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चमत्कारी बाबा नीब करौरी ने देश ही नहीं विदेशी भक्तों में भी जगाई हनुमान जी की भक्ति

ByVijay Singhal

Nov 28, 2025
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में फिरोजाबाद अकबरपुर गांव में जन्मे बाबा लक्ष्मण दास से बाबा नीब करौरी महाराज बने हनुमानजी के परम भक्त का जीवन चमत्कारिक रहा है। कभी उन्होंने पोखर के पानी से कार को चलवा दिया तो कभी खारे पानी के कुएं से मीठा पानी पिलाया। उन्होंने देशभर में 31 मंदिर स्थापित किए, जिनकी संख्या वर्तमान में 100 से अधिक हो गई है। उन्होंने हनुमानजी की भक्ति को अमेरिका और कनाडा सहित कई देशों में पहुंचाया। बाबा नीब करौरी आश्रम के प्रबंधक भगवत शर्मा ने बताया कि बाबा 18 वर्ष तक नीब करौरी गांव में रहे। इसके बाद गंगा घाट किनारे फतेहगढ़ में किला घाट में निवास किया। 1940 के बाद नैनीताल के कैंची धाम और फिर वृंदावन में रहने लगे और यहीं शरीर त्याग दिया। बाबा नीब करौरी महाराज का जन्म साल 1900 में फिरोजाबाद के अकबरपुर गांव में माघ माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को हुआ। जमींदार ब्राह्मण परिवार में जन्मे लक्ष्मी नारायण शर्मा उर्फ बाबा नीब करौरी महाराज भगवान की भक्ति में लीन रहे। लक्ष्मी नारायण शर्मा उर्फ बाबा नीब करौरी महाराज का विवाह 11 वर्ष की उम्र में गांव बादाम वास निवासी राम बेटी के साथ हुआ। 13 साल की उम्र में उन्होंने घर का त्याग कर दिया। इसके बाद 10 साल बाबा कहां रहे, यह किसी को पता नहीं है। बाबा नीब करौरी ने 1950 के बाद हनुमान मंदिर बनाना शुरू किया। बाबा ने कैंची धाम नैनीताल, वृंदावन नीब करौरी, लखनऊ में हनुमान सेतु का हनुमान मंदिर आदि जगह पर 31 मंदिरों की स्थापना की। इन सभी मंदिरो में अपने आराध्य हनुमानजी की स्थापना की। बाबा नीब करौरी महाराज ने भाद्र शुक्ल पक्ष अनंत चतुर्दशी के दिन 1973 में अपना शरीर वृंदावन में त्याग दिया। वृंदावन में परिक्रमा मार्ग स्थित नीब करौरी मंदिर परिसर में बाबा की समाधि बनी हुई है। यहां हनुमान जी का भव्य मंदिर है। वहीं आश्रम में बाबा की समाधि और बाबा का वह कमरा है, जहां वह ध्यान लगाते थे। इसके अलावा आश्रम परिसर में ही शिवालय, गोशाला, यज्ञशाला एवं ध्यान कक्ष स्थापित है। यहां हरिनाम संकीर्तन होता है।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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