हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। लोकसभा चुनाव नजदीक आते ही मथुरा के प्रमुख उद्योगों में शुमार साड़ी उद्योग को पंख लग गए हैं। साड़ी छपाई कारखानों में अब आगामी डेढ़ माह से दो माह तक राजनीतिक दलों के झंडे छपाई का काम होगा। करीब दो लाख कामगारों को इससे रोजगार मिलेगा। 2019 लोकसभा चुनाव में करीब 20 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था। इस बार 30 करोड़ रुपये के कारोबार के आसार हैं। दिल्ली, राजस्थान, लखनऊ, मप्र, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड सहित देशभर के सप्लायर यहां करोड़ों झंडों की छपाई का ऑर्डर दे रहे हैं। साड़ी उद्योग के संरक्षक राजेश बजाज बताते हैं कि जिले में 45 साड़ी कारखाने संचालित हैं। रोटो और सार्टन के कपड़े का उपयोग इनके निर्माण में किया जाता है। सबसे अधिक मांग 20 गुणा 30 साइज के झंडे की होती है, जो कि सार्टन में 8 रुपये और रोटो में पांच रुपये का है। वहीं, 28 गुणा 42 का झंडा सार्टन में 15 रुपये और रोटो में 9 रुपये का है। 40 गुणा 60 का रोटो में 24 और सार्टन में 33 रुपये का है। इनके अलावा राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह व रंग की छाप वाले दुपट्टे भी डेढ़ मीटर के तैयार हो रहे हैं। इनकी कीमत रोटो में दो और सार्टन में चार रुपये है। साड़ी उद्यमी भावेश अग्रवाल ने बताया कि भाजपा के झंडों की सबसे अधिक मांग है। इसके बाद उप्र में सपा, बसपा, रालोद के झंडों की मांग है। वहीं, दक्षिण भारत के राज्यों से कांग्रेस और भाजपा के झंड़ों की बराबर मांग है। मथुरा वैसे तो भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि के नाम से जानी जाती है, लेकिन चुनाव में यहां के झंडे अपनी अलग पहचान रखते हैं। चुनावी माहौल होते ही यहां के साड़ी छपाई उद्योग को झंडे छपाई का काम मिलने पंख लग जाते हैं। 2014 चुनाव में मथुरा से करीब 6 करोड़ झंडे छापकर देशभर में भेजे गए। 2019 में 10 करोड़ के करीब झंडे बनवाए थे। इस बार 13 करोड़ के करीब झंडे छपाई के ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। दरअसल, मथुरा में अन्य शहरों के मुकाबले झंडे की छपाई की दरें कम हैं। साथ ही यहां मजदूरी भी सस्ती पड़ती है। यही वजह है कि सभी दलों को झंडा छपाई के लिए कृष्णनगरी ही रास आती है। औद्योगिक क्षेत्र समेत सरस्वती कुंड व मसानी बाईपास स्थित आधा दर्जन से ज्यादा छपाई कारखाने इन दिनों झंडे छापने का काम कर रहे हैं।
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Author: Vijay Singhal
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