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मथुरा। गोवर्धन चौराहा स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान किसान की मृत्यु होने पर ग्रामीणों का गुस्सा फूटा गया। आक्रोशित महिलाओं ने एसएसपी कार्यालय पर करीब एक घंटे तक करुण क्रंदन और हंगामा किया। कचहरी रोड पर बाइक खड़ी करके जाम लिया दिया और अस्पताल संचालक पर कार्रवाई की मांग करने लगे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें समझाकर कोतवाली थाने भेजा। राया के पिलुखनी निवासी तेजवीर सिंह ने बताया कि वह अपने बड़े भाई रामेश्वर सिंह (53) को शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे पथरी का ऑपरेशन कराने के निए गोवर्धन चौैराहे स्थित एक निजी अस्पताल ले गए थे। आपरेशन से पहले डॉक्टरों ने चेकअप करने के बाद ऑपरेशन करने की तैयारी शुरू कर दी। ऑपरेशन से ठीक पहले डॉक्टरों ने रामेश्वर को एक इंजेक्शन लगाया। इसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई। मुंह से झाग निकलने लगा और सांस थमने लगीं। आरोप कि ऑपरेशन में लापरवाही बरतने पर उनकी वहीं मृत्यु हो गई। इसके बाद डॉक्टर दूसरे अस्पताल रेफर करने लगे। परिजन ने पूछताछ की तो डॉक्टर और स्टाफ शव छोड़कर वहां से भाग निकले। मृत्यु की भनक लगने पर परिवार वालों ने हंगामा शुरू कर दिया। कार्रवाई की मांग करने लगे, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। इसके बाद शनिवार को दर्जनों ग्रामीण एकजुट होकर एसएसपी कार्यालय पहुंच गए। यहां करीब एक घंटे तक ग्रामीणों ने हंगामा किया। महिलाएं जमीन पर गिरकर करुण क्रंदन करने लगीं। मौजूद पुलिस कर्मियों ने उन्हें समझाकर कोतवाली थाने भेज दिया। कोतवाली पुलिस ने उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया और तहरीर ले ली। सीओ सिटी आशना चौधरी ने बताया कि डॉक्टरों के पैनल की निगरानी में शव का पोस्टमार्टम कराया है। इसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग नियमानुसार कार्रवाई करेगा। इधर, पोस्टमार्टम होने के बाद ग्रामीण शव लेकर गांव के लिए रवाना हो गए। परिजन का कहना कि अगर नियमानुसार कार्रवाई नहीं हुई तो फिर एसएसपी कार्यालय पर प्रदर्शन करेंगे। 7455095736

ByVijay Singhal

Nov 9, 2025
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल

मथुरा। जिले की पंचायत ग्राम नगला काशी के मजरा पंडीपुर में बाल्मीकि बस्ती के लोग पिछले कई महीनों से रास्ता तय कर रहे हैं। बाल्मीकि समाज के लोगों का आरोप है कि गांव के कुछ दबंग व्यक्ति उन्हें इस रास्ते से नहीं दे रहे हैं और जाति सूचक शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं। ग्राम प्रधान सत्यवीर चौधरी ने बताया कि बाल्मीकि समाज के लोग वर्षों से इसी पद्धति का प्रयोग करते आ रहे हैं, लेकिन अब कुछ गाबी लोग उन्हें विस्थापित कर रहे हैं। शिकायत संबंधित अधिकारियों को जेल भेज दिया गया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई या समाधान नहीं हुआ है। इस मामले से स्थानीय लोगों में असंतोष और तनाव बना हुआ है।

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Author: Vijay Singhal

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