हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। बाइक चोरी के फर्जी मामले में विशेष जांच मुख्यालय, लखनऊ के एसपी ने छह पुलिसकर्मियों को ही दोषी पाया है जबकि करीब डेढ़ साल पहले इस मामले में 33 पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया गया था। आरटीआई से जानकारी मिलने पर पीड़ित परिवार अब इस मामले को राष्ट्रीय एससी-एसटी आयोग के समक्ष लेकर जाएगा।मामला 10 जनवरी 2018 का है। गोविंदनगर पुलिस और एसओजी ने मां की दवाई लेकर दिल्ली से लौटते हुए बिरजापुर के पुनीत कुमार को थाना हाईवे इलाकेे से उठाया था। बाइक चोरी के फर्जी केस और तमंचा बरामदगी दिखाकर उसे जेल भेजने में देर नहीं की। पुनीत के साथ चेतन निवासी कृष्णा विहार कॉलोनी, रिफाइनरी को जिला अस्पताल से 15 अक्तूबर 2017 को बाइक चोरी करना बताया था और यही पुलिस के लिए गले की फांस बन गया। दरअसल चेतन उस दिन जेल में था। इसके बाद पुनीत के भाई सुमित ने इस मामले को लेकर साल 2019 में मथुरा पुलिस की शिकायत एससी-एसटी आयोग लखनऊ से की। आयोग ने पहले एडीजी आगरा के माध्यम से मथुरा और आगरा पुलिस से जांच कराई। इससे संतुष्ट नहीं हुआ तो मुख्यालय पुलिस महानिदेशक ने विशेष जांच कराई। इसकी रिपोर्ट के आधार पर 33 पुलिसकर्मियो दोषी मानते हुए 6 सितंबर 2021 को उन्हें नोटिस भेज दिए। जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए
दोषी पुलिसकर्मियों ने मुख्यालय में हाजिर होकर जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए तो फिर जांच शुरू की गई। करीब एक साल में जांच पूरी करने के बाद 28 अक्तूबर 2022 को छह पुलिसकर्मियों को दोषी मानते हुए एसपी विशेष जांच मुख्यालय, रामयज्ञ ने यूपी एससी-एसटी आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। विशेष जांच की पहली रिपोर्ट में 33 पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया था। पीड़ित सुमित कुमार का कहना है कि जांच में कतई निष्पक्षता नहीं बरती गई है। इस मामले को वह राष्ट्रीय एससी-एसटी आयोग के समक्ष ले जाएंगे। अब केवल इन्हें माना गया दोषी
-विजय शंकर मिश्रा एएसपी सोनभद्र (तत्कालीन सीओ सिटी मथुरा), राजेश सोनकर एएसपी देवरिया (तत्कालीन एएसपी अपराध मथुरा), आलोक दुबे पुलिस उपाधीक्षक गाजियाबाद(तत्कालीन सीओ रिफाइनरी), अवधेश त्रिपाठी, तत्कालीन एसएचओ थाना हाईवे, प्रदीप कुमार तत्कालीन एसआई कोतवाली व अनिल शर्मा तत्कालीन एसआई कोतवाली।
पहले इन्हें बनाया गया था दोषी
-सीओ प्रीति सिंह, निरीक्षक शिवप्रताप सिंह, रामपाल सिंह, हरवेंंद्र मिश्रा, नितिन कसाना, राजवीर सिंह, धर्मवीर कर्दम, रामफूल शर्मा, सुल्तान सिंह, प्रदीप कुमार, विपिन भाटी, नरेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, सुरेंद्र कुमार, विशाल गौतम, अवनीश कुमार, अभिजीत कुमार, रोहित जनमेदा, लोकेश कुमार भाटी, वसीम अकरम, नितिन कुमार, आर्यन दुबे, हरवीर सिंह, गौतम प्रताप सिंह, सुदेश कुमार व दो अन्य।
दोषी पुलिसकर्मियों ने मुख्यालय में हाजिर होकर जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए तो फिर जांच शुरू की गई। करीब एक साल में जांच पूरी करने के बाद 28 अक्तूबर 2022 को छह पुलिसकर्मियों को दोषी मानते हुए एसपी विशेष जांच मुख्यालय, रामयज्ञ ने यूपी एससी-एसटी आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। विशेष जांच की पहली रिपोर्ट में 33 पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया था। पीड़ित सुमित कुमार का कहना है कि जांच में कतई निष्पक्षता नहीं बरती गई है। इस मामले को वह राष्ट्रीय एससी-एसटी आयोग के समक्ष ले जाएंगे। अब केवल इन्हें माना गया दोषी
-विजय शंकर मिश्रा एएसपी सोनभद्र (तत्कालीन सीओ सिटी मथुरा), राजेश सोनकर एएसपी देवरिया (तत्कालीन एएसपी अपराध मथुरा), आलोक दुबे पुलिस उपाधीक्षक गाजियाबाद(तत्कालीन सीओ रिफाइनरी), अवधेश त्रिपाठी, तत्कालीन एसएचओ थाना हाईवे, प्रदीप कुमार तत्कालीन एसआई कोतवाली व अनिल शर्मा तत्कालीन एसआई कोतवाली।
पहले इन्हें बनाया गया था दोषी
-सीओ प्रीति सिंह, निरीक्षक शिवप्रताप सिंह, रामपाल सिंह, हरवेंंद्र मिश्रा, नितिन कसाना, राजवीर सिंह, धर्मवीर कर्दम, रामफूल शर्मा, सुल्तान सिंह, प्रदीप कुमार, विपिन भाटी, नरेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, सुरेंद्र कुमार, विशाल गौतम, अवनीश कुमार, अभिजीत कुमार, रोहित जनमेदा, लोकेश कुमार भाटी, वसीम अकरम, नितिन कुमार, आर्यन दुबे, हरवीर सिंह, गौतम प्रताप सिंह, सुदेश कुमार व दो अन्य।
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Author: Vijay Singhal
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