हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। मांट के वेलवन में बांसुरी की धुन पर श्रीकृष्ण के साथ महारास में सम्मलित होने के लिए महालक्ष्मीजी आज भी यमुना किनारे बेलवन में तपस्या कर रही हैं। यहां पौष माह के प्रत्येक बृहस्पतिवार को मेले का आयोजन किया जाता है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण मांट के निकट यमुना किनारे बेलवन में रास रचाते थे। एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने महारास के दौरान बांसुरी बजाई तो उसकी आवाज देवलोक तक जा पहुंची। महालक्ष्मी ने नारदजी से पूछा तो उन्होंने बताया कि बेलवन में यमुना किनारे भगवान श्रीकृष्ण बांसुरी बजा रहे हैं। महालक्ष्मी बेलवन पहुंचीं और रास में प्रवेश करना चाहा तो वहां मौजूद गोपियों ने उन्हे रोक दिया। महालक्ष्मी ने गोपियों को भला-बुरा कह डाला। श्रीकृष्ण को यह बुरा लगा, उन्होंने महालक्ष्मी से कहा कि यह साधारण गोपियां नहीं हैं। इन्होंने हजारों वर्ष तपस्या कर रास में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त किया है। यदि आपको भी रास में शामिल होना है तो पहले तपस्या कर गोपियों को प्रसन्न करना होगा। तभी में आपको रास में शामिल करूंगा। मान्यता है कि तभी से महालक्ष्मीजी यहां गोपी रूप में तपस्या कर रही हैं। द्वापर युग में बेल के पेड़ों की प्रचुरता के कारण इस स्थान को बेलवन कहा जाता था। यह वृंदावन से मात्र दो किलोमीटर दूर है।
महालक्ष्मी मंदिर समिति के अध्यक्ष सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि महालक्ष्मीजी को स्वयं भगवान श्रीकृष्ण खिचड़ी का प्रसाद खिलाते हैं। पौष माह के प्रत्येक बृहस्पतिवार को मेले का आयोजन किया जाता है। प्रसाद रूप में महालक्ष्मीजी को खिचड़ी, रेबड़ी, गजक का भोग लगाया जाता है। इस बार पहला मेला आठ दिसंबर को लगेगा। सुरक्षा के दृष्टिगत आधा दर्जन से अधिक थानों का पुलिस बल और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
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