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हाइवे थाना क्षेत्र में 23 वर्ष पुराने दतिया जातीय संघर्ष के 15 दोषियों को आजीवन कारावास

ByVijay Singhal

Feb 1, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। हाईवे थाना क्षेत्र के गांव दतिया में 23 वर्ष पूर्व पंचायती भूखंड पर कब्जे में सवर्ण व अनुसूचित जाति के बीच हुए जातीय संघर्ष की घटना में बुधवार को मथुरा की एडीजे एससी/एसटी मनोज कुमार मिश्रा की कोर्ट ने फैसला सुनाया। इसके अनुसार, 15 दोषियों को आजीवन कारावास व प्रत्येक पर 73 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। सजा सुनते ही दोषियों के परिजन फूट-फूटकर रो पड़े। इस जातीय संघर्ष में अनुसूचित पक्ष का आरोप था कि सवर्ण पक्ष ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग की। घरों में लगा दी। फायरिंग में एक व्यक्ति को गोली लगी। वहीं, आगजनी में छह माह की मासूम जिंदा जल गई थी। विशेष लोक अभियोजक सुरेश प्रसाद शर्मा ने बताया कि थाना हाईवे (तब नरहौली)के गांव दतिया में 23 जनवरी की सुबह 7 बजे करीब पंचायती भूखंड पर सवर्ण पक्ष की ओर से निर्माण कार्य शुरू करा दिया था। इसका अनुसूचित जाति के लोगों ने विरोध किया था। विरोध ने जातीय संघर्ष का रूप ले लिया था। अनुसूचित जाति के होरीलाल ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि सवर्ण पक्ष ने गांव में मारपीट, फायरिंग, आगजनी की, जिसमें अनुसूचित जाति के राजेंद्र सिंह की जांघ में गोली लगी। वहीं, छह माह की मासूम बच्ची गुड़िया अपनी झोपड़ी में जिंदा जल गई। पुलिस ने तहरीर के आधार पर 16 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया। सीओ सदर ने इसकी जांच की। बाद में जांच सीबीसीआईडी आगरा भेज दी गई। विवेचना में 8 और आरोपियों के नाम सामने आए। प्रथम चार्जशीट दिसंबर 2005 और द्वितीय जनवरी 2006 में कोर्ट में दाखिल हुई। आरोपी पक्ष सुनवाई पर इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्टे ले आया। बाद में स्टे हटा और 2021 में मामले की सुनवाई में तेजी आई। 25 जनवरी 2024 को इस मुकदमे में बहस, साक्ष्य पूरे हुए। दौरान-ए-ट्रायल इस मुकदमे के 9 आरोपियों की मौत हो गई। बाकी के 15 आरोपियों को बुधवार को अदालत ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास व 73-73 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सभी दोषियों को जेल भेज दिया गया है। दोषियों के परिजन बोले, जाएंगे हाईकोर्ट एसपीओ सुरेश प्रसाद शर्मा ने बताया कि कोर्ट में 14 गवाह पेश किए गए। इनमें पुलिस के चार गवाह, गुड़िया का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर, राजेंद्र का उपचार करने वाला आगरा के एसएन मेडिकल कालेक के डॉक्टर व अन्य 8 प्राइवेट गवाह थे। इनमें से 2 गवाह अदालत में पक्षद्रोही हो गए। उन्होंने वारदात का समर्थन नहीं किया। दोनों को पक्षद्रोही करार दिया गया है।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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