हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। बलदेव कस्बे से चार 4 किलोमीटर दूर राया रोड पर गांव बंदी स्थित मंदिर में बंदी, आनंदी व मनोवांछा देवी के विग्रह स्थापित हैं। नवरात्र में यहां दर्शन पूजन के लिए भक्तों की भीड़ रहती है। 11 अप्रैल को यहां विशेष आयोजन होगा। बंदी-आनंदी मंदिर का प्राचीन इतिहास है। मान्यता के अनुसार यह देवी श्रीकृष्ण एवं बलराम की कुलदेवी हैं। दोनों का मुंडन यहीं हुआ था। बंदी माता के चमत्कार का वर्णन भागवत के 10वें स्कंध के तीसरे और चौथे अध्याय में मिलता है। इसके अनुसार कंस की जेल में भगवान कृष्ण के जन्म के समय योगमाया के चमत्कार से पहरेदार सो गए थे। वासुदेव कृष्ण को नंद बाबा के यहां छोड़ आए। वासुदेव-देवकी को बंधनों से मुक्त कराने और नंद के घर आनंद बरसाने पर यही बंदी, आनंदी देवी नाम से विख्यात हुईं। गर्ग संहिता के अनुसार मां बंदी ने महारास के समय राधाजी का शृंगार किया। बंदी ने राधा के माथे का तिलक और आनंदी ने कर्ण-आभूषण भेंट किए। तीसरी मैया मनोवांछा देवी हैं। मान्यता है कि यशोदा ने कंस से कृष्ण-बलराम की रक्षा की कामना की थी। मनोकामना पूर्ण होने पर यही मनोवांछा देवी कहलाईं। मंदिर के पास में स्थित आनंद कुंड को मूर्तियों का प्राकट्य स्थल माना जाता है। वर्तमान मंदिर का निर्माण सन 1300 में आगरा के देवी भक्त घासीराम सेठ ने कराया था। मान्यता है कि बालक हकलाता हो या आंखों में समस्या हो तो मंदिर में चांदी की जीभ या आंख चढ़ाने से समस्या दूर हो जाती है। पुत्र प्राप्ति के लिए उल्टा स्वास्तिक बनाने से संकल्प पूरा होता है और बाहरी हवा के चक्कर से भी मुक्ति दिलाती है। प्रधान ठा. मानवेंद्र सिंह व पं कृपाशंकर द्विवेदी ने बताया 11 अप्रैल को यहां मातारानी का शृंगार कर फूल बंगला सजाया जाएगा। जात मेला लगेगा और देवी माता का जागरण होगा। हजारों की संख्या में लोग अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराएंगे।
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Author: Vijay Singhal
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