हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। कान्हा की नगरी में ह्रदय रोगी लगातार बढ़ रहे हैं। इसके लिए अनियमित खानपान और जीवनशैली सबसे बड़ा कारण सामने आया है। चिंता की बात है कि बुजुर्गों के ज्यादा युवा दिल के डॉक्टरों के पास चक्कर लगा रहे हैं। अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन 350-400 मरीज कार्डियोलॉजिस्ट के पास पहुंच रहे हैं। इसका मासिक औसत लगभग 12 हजार बैठ रहा है। उधर, सरकारी स्तर पर दिल के रोगियों का हाल जानने के लिए कोई सुविधा नहीं है। हृदय रोग चिकित्सक तो दूर की बात जिला अस्पताल में बीते 8-9 वर्ष से फिजीशियन तक नहीं है। इस स्थिति में लोगों को मोटा पैसा खर्च कर निजी अस्पतालों में उपचार करवान पड़ रहा है। कोविड काल के बाद यह देखने में आया है कि बुजुर्गों के साथ युवा भी डांस करते समय, बैठे-बैठे अथवा चलते हुए ही जमीन पर गिरे और फिर उठ ही नहीं सके। साइलेंट अटैक में उनकी मौत हो जा रही है। मथुरा में ही प्रतिमाह में लगभग 12 हजार रोगी निजी कार्डियोलॉजिस्ट अथवा फिजीशियन के पास दिल की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें भी अधिकतर मरीज लगभग 40 वर्ष आयु वाले ही हैं। चिकित्सक बताते हैं कि कम श्रम, अनियमित खानपान, तैलीय पदार्थोंं का अधिक सेवन और दिनोदिन बिगड़ती दिनचर्या हृदय रोग का सबसे बड़ा कारण है। ऐसे में समय रहते ही सतर्क होने की जरूरत है। मथुरा जनपद में खाने के शौकीनों का आलम यह है कि कचौरी और बेड़ई की दुकानों पर दिनभर ग्राहकों की भीड़ उमड़ती है। लोग सुबह ही दुकानों पर पहुंच जाते हैं और यहीं नाश्ता करने के बाद अपने काम पर जाते हैं। कोई दुकान पर न आ सके तो घर पर ही नाश्ता मंगवा लेता है। चिकित्सकों का मानना है कि समय के साथ युवाओं में श्रम करने की आदत छूट रही है। ऐसे में तैलीय पदार्थों का अधिक सेवन निसंदेह शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है। जिस तेल में इन्हें बनाया जा रहा है, उसकी क्वालिटी क्या है, उसका दिन में कितनी बार इस्तेमाल किया गया है, इसके बारे में कोई जानना नहीं चाहता और स्वाद के लालच में दिल को कमजोर कर रहा है। हृदय रोगों में क्या-क्या शामिल: स्ट्रोक, जन्मजात हृदय दोष, हृदयाघात, कार्डियक अरेस्ट, पेरिकार्डियल बहाव, रुमेटिक हृदय रोग, कोरोनरी धमनी रोग, एनजाइना आदि शामिल है। डॉ. शिवानंद पटेल, कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया
आधुनिक जीवनशैली, शुगर, धूम्रपान के कारण युवाओं के ह्दय कमजोर हो रहे हैं। कोविड के बाद खून गाढ़ा होने की समस्या भी बढ़ी है। इसके चलते ह्दयघात हो रहे हैं। बुजुर्गों के साथ युवाओं को भी अपने स्वास्थ्य की जांच समय-समय पर करानी चाहिए। डॉ. अजय कुमार वर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा दिल के दौरे और स्ट्रोक से बचे लोग स्पष्ट चेतावनियों के बावजूद वापस पुराने तरीकों पर ही लौट आते हैं। इन बुरी आदतों में खराब खानपान, व्यायाम न करना, पूरी नींद न लेना, अत्यधिक शराब व धूम्रपान करना, दवाओं का समय पर न लेना शामिल है। डॉ. अर्पित तिवारी, कार्डियोलॉजिस्ट
लगातार व्यायाम हृदय रोग के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कवच है। प्रत्येक दिन कम से कम 30 मिनट टहलना आवश्यक है। इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
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Author: Vijay Singhal
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