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व्रन्दावन में 400 एकड़ में ब्रज के पौराणिक पौधों का जंगल दिखेगा, 10 एकड़ का बन रहा कालीदह कुंड

ByVijay Singhal

Nov 25, 2022
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा के वृंदावन में देश का सबसे बड़ा सिटी फॉरेस्ट बन रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई योजना लागू की हैं। इन्हीं में से एक है सौभरी ऋषि वन। वृंदावन में यमुना किनारे बन रहे इस वन को तैयार करने के लिए विभाग तेजी से काम कर रहे हैं। जिससे जल्द से जल्द इसे आम लोगों के लिए खोला जा सके।
पुराणों के अनुसार सतयुग में कर्णव ऋषि के कुल के सौभरी ऋषि यमुना किनारे इसी स्थान पर तपस्या करते थे। यहां सौभरी ऋषि ने 60 हजार वर्ष तक तपस्या की थी। यहां यमुना नदी में गरुड़ मछली आदि का शिकार करने आते थे। सौभरी ऋषि ने गरुड़ जी को श्राप दिया था कि वह इस स्थान से 1 यौवन यानी 4 किलोमीटर के क्षेत्र में आए तो जलकर भस्म हो जायेंगे। इसके बाद यहीं यमुना नदी में कालिया नाग रहने लगा। जिसे बाद में भगवान कृष्ण ने नाथ कर समुद्र में भेज दिया। उन्हीं सौभरी ऋषि की तपोस्थली है यह सुनरख गांव। जहां यमुना किनारे इस वन का निर्माण कराया जा रहा था। वृंदावन में सुनरख, आटस और जहांगीर पुर खादर में 400 एकड़ में बनाए जा रहे इस पार्क में ब्रज के पौराणिक महत्व के वृक्ष लगाए जायेंगे। करीब 15 से 20 किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस वन में कई प्रजाति के पौधा रोपण किया जा रहा है। इनमें कई वृक्ष जहां पौराणिक महत्व के हैं वहीं कई ऐसे हैं जो बाढ़ के पानी को सोखने में सहायक होंगे।

सौभरी ऋषि वन में पहले चरण में 130 हेक्टेयर में काम हो रहा है। यहां वन विभाग ने 76 हजार 875 पौधे रोपे हैं। इसमें पीपल,पाखर, बेर, बेल,जामुन,आंवला,शीशम,नीम,अर्जुन,बांस, गूलर आदि के पौधे हैं। 2021 में रोपित किए गए पौधे अब कुछ बड़े हुए हैं,उम्मीद है की 2023 अंत तक पौधे काफी बड़े हो जायेंगे। मथुरा में बंदर बड़ी समस्या है। बंदरों के कारण कई लोग हर दिन चुटैल हो जाते हैं कई बार मौत तक हो जाती है। बंदरों की समस्या को लेकर कई बार आंदोलन हुए और यह चुनावी मुद्दा भी बना। बंदरों की समस्या से निपटने के लिए शासन स्तर पर बैठक भी हुई। डिस्ट्रिक्ट फॉरेस्ट ऑफिसर रजनीकांत मित्तल ने बताया कि इस वन के बनने से बंदरों की समस्या से भी निजात मिल जायेगी। इस वन में फलदार वृक्षों की भी कई प्रजातियां रोपित की गई हैं। वृक्ष बड़े हो जाने के बाद बंदरों को शहर से यहां ला कर छोड़ा जाएगा।
मथुरा वृंदावन में बंदरों के अनुकूल कोई जगह नहीं हैं। जिसकी वजह से बंदर अब हमलावर हो गए हैं। प्राकृतिक वातावरण न मिल पाने के कारण बंदर शहर में घुस आए हैं और वह हर दिन किसी न किसी पर हमला कर देते हैं। लेकिन इस वन के बनने के बाद इस समस्या से निजात मिलने की उम्मीद है। सौभरी ऋषि वन में वन विभाग के अलावा मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण और ब्रज तीर्थ विकास परिषद भी काम कर रहा है। मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण ने इस वन की कटीले तारों से फेसिंग कराई है तो ब्रज तीर्थ विकास परिषद इसमें लैंड स्केप, वाटर बॉडी यानी तालाब बनाएगा। इस वन में सबसे बड़ा तालाब 10 एकड़ में बनेगा। सौभरी ऋषि मंदिर के नीचे बनने वाले इस कुंड का नाम कालीदह कुंड होने की संभावना है। कहा जाता है कि इसी स्थान गरुड़ से बचने के लिए कालिया नाग ने शरण ली थी। द्वापर में भगवान कृष्ण ने कालिया नाग को युद्ध में हराने के बाद उसे समुद्र में भेज दिया था।
यही वजह है कि ब्रज तीर्थ विकास परिषद इस कुंड का नाम कालीदह कुंड रख सकता है। मथुरा वृंदावन नगर निगम के अपर आयुक्त क्रांति शेखर सिंह ने बताया कि इस वन के काम पूरे होने के बाद इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जायेगा। इस वन में स्थानीय लोग वॉक तो कर ही सकते हैं इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र होगा। इसमें योगा सेंटर,झूला लगाए जायेंगे। इसके अलावा आकर्षक लाइटिंग भी की जायेगी। इसके पहले चरण का काम पूरा होने के बाद दूसरे चरण का काम 37 हेक्टेयर में शुरू होगा। अपर आयुक्त ने बताया कि 2023 अंत तक इस वन के काम पूरा कर लिए जाएंगे।

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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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