हिदुस्तान 24 टीबी न्यूज़ चीफ विजय सिंघल
मथुरा को भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली और लीला स्थली के नाम से तो जाना ही जाता है लेकिन इसकी एक और पहचान है वह है यहां का पेड़ा। मथुरा का नाम आते ही मुंह में पानी आ जाता है, इसकी वजह है यहां का प्रसिद्ध पेड़ा। लेकिन वर्तमान में यहां का पेडा जायका बिगाड़ रहा है। यहां मावा से बनने वाला पेडा मावा से सस्ता बिक रहा है। जिसकी वजह से अब स्थानीय लोग सोशल मीडिया पर इसके मिलावटी होने पर संदेह जता रहे हैं। मथुरा का पेडा विश्व प्रसिद्ध है। इसकी वजह है इसका स्वाद। पेडा बनाने के लिए सबसे पहले जरूरत होती है मावा की। मावा को मंद आग पर तब तक भुना जाता है जब तक कि इसका रंग ब्राउन न हो जाए। इसके बाद इसमें कहीं चीनी तो कहीं रवा मिलाया जाता है। इसके बाद इसके छोटे छोटे टेढ़े मेढे गोले बनाए जाते हैं और फिर तैयार होता है पेड़ा। एक किलो पेडा बनाने में जो लागत आती है वह करीब 350 रुपए के आती है। इसमें 300 रुपए किलो का मावा, 25 रुपए की चीनी,15 रुपए की गैस और दस रुपए करीब मेहनत के होते हैं। मावा को कम से कम आधा घंटे तक भुना जाता है इसके बाद उसका रंग ब्राउन होता है। अभी तक जाना कि पेडा कैसे बनता है और एक किलो तैयार करने में कितनी लागत आती है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर लोग पेडा के दामों को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट कर रहा है कि 300 रुपए किलो मावा 200 रुपए किलो पेडा, कोई इसे मिलावटी बता रहा है। वहीं एक कवि ने तो कविता के माध्यम से कटाक्ष भी किया है। कवि अशोक अज्ञ ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर की गई पोस्ट में लिखा है।
सोशल मीडिया पर की जा रही पोस्ट की हकीकत जानने के लिए मीडिया ने ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए इसकी कीमत जानने का प्रयास किया। मीडिया की टीम पहुंची विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के आसपास बिक रहे पेड़ों की दुकान पर। यहां पेड़े की करीब 40 से 50 दुकान थी। अधिकांश दुकानों पर कई कई तरह के पेड़े रखे थे। दिखने में एक जैसे पर रेट सभी पर अलग अलग। अलग अलग रेट के पेड़े देखकर असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई। समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा क्यों।
मथुरा वृंदावन में पेडा के रेट अलग अलग हैं। यहां कहीं पेडा 200 रुपए किलो,कहीं 300 रुपए किलो, कहीं 480 रुपए किलो बिक रहा है। 200 और 300 रुपए किलो बिक रहा पेडा ही इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहा है। असली नकली पेडा के बारे में जानकारी करने टीम वृंदावन के प्रसिद्ध मिठाई की दुकान बांके लाल पेडा वालों की दुकान पर पहुंची। यहां पेडा 480 रुपए किलो बिक रहा था। दुकान स्वामी लव अग्रवाल से जब इतनी ज्यादा कीमत होने के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि जब मावा 300 रुपए किलो है तो फिर इतना रेट पर तो बिकेगा ही। सोशल मीडिया पर पेडा की क्वालिटी को लेकर जब सवाल खड़े होने शुरू हुए तो खाद्य विभाग नींद से जागा। खाद्य विभाग ने पिछले कुछ दिनों में खराब पेडा, मावा आदि खाद्य पदार्थों की बिक्री कर रहे दुकानदारों पर मथुरा,वृंदावन और गोवर्धन में छापेमारी की। टीम ने वृंदावन में 7 कुंतल तो गोवर्धन में 4 कुंतल मावा नष्ट कराया। इसके अलावा दोनों जगह से 9 सैंपल लिए। हालांकि पिछले महीनों में जो सैंपल लिए थे उसमें से 40 प्रतिशत के नमूने लैब में टेस्टिंग के बाद फेल हुए थे।
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Author: Vijay Singhal
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