हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। गोवर्धन में ब्रज की पुण्य धरा पर भक्त और भगवान का रिश्ता केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि वह अपनत्व और समर्पण की उस भावधारा से जुड़ा होता है, जहां सेवा ही सबसे बड़ा सुख बन जाती है। इसी भाव का सजीव दर्शन सोमवार की मध्यरात्रि गोवर्धन में हुआ, जब श्री गिरिराज जी सेवा मंडल परिवार, आगरा द्वारा आयोजित छप्पन भोग एवं फूल बंगला महोत्सव के समापन पर प्रभु गिरिराज महाराज के लिए भाव-वात्सल्य से सुसज्जित शयन उत्सव मनाया गया। कार्ष्णि आश्रम, गोवर्धन में वैकुंठ लोक झांकी के मध्य स्वर्ण हंस रथ पर विराजमान गिरिराज महाराज दिनभर श्रद्धालुओं को दर्शन देते रहे। कोई मनौती लेकर पहुंचा तो कोई कृतज्ञ भाव से निहाल हुआ। जैसे-जैसे रात्रि गहराती गई, सेवकों के हृदय में यह भाव जागृत हुआ कि निरंतर भक्तों की सुध लेते-लेते प्रभु अवश्य थक गए होंगे। इसी आत्मीय अनुभूति ने शयन उत्सव का रूप ले लिया। सुगंधित इत्र से प्रभु के श्रीअंगों की कोमल सेवा की गई, प्रेमपूर्वक नजर उतारी गई और चरण कमलों को स्नेह से दबाया गया। शयन आरती के दौरान जब करुण भजन नैनन में नींद समा गई, मेरे प्रिय प्रभु के… गूंज उठा, तो वातावरण भावनाओं से भर गया।
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Author: Vijay Singhal
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