हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। ब्रज भूमि है ही अलौकिक। जो भी यहां आया, यहां का होकर रह गया। गुरुवार को पहली बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु धर्म नगरी में आईं तो भक्ति में रम गईं। ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन कर राष्ट्र में शांति व सद्भाव की कामना की। निधिवन पहुंचीं तो ठाकुर जी की प्राकट्यस्थली के दर्शन कर वह स्थल भी देखा जहां ठाकुर जी नित्य रास रचाते हैं। स्वामी हरिदास की समाधि स्थल पर पादुका पूजन कर आरती उतारी। महामहिम ने श्रीकुब्जा कृष्ण के उस मंदिर को चर्चा में ला दिया, जिसके बारे में बहुत से ब्रजवासियों को भी जानकारी नहीं है। महामहिम ने दर्शन किए तो मंदिर खास हो गया। जन्मस्थान में उस कारा को देर तक निहारतीं रहीं, जहां कन्हैया ने द्वापर में जन्म लिया। निधिवन में ठाकुर बांकेबिहारी की प्राकट्यस्थली के दर्शन कर वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य पूजन किया। उस रंग महल को निहारा, जहां नित रात में ठाकुरजी विश्राम करते हैं। साड़ी और शृंगार अर्पित किया। स्वामी हरिदास की समाधि स्थल पर चांदी की चरण पादुका का पूजन किया
निधिवन का महत्व जान अभिभूत हो गईं। श्रद्धाभाव ऐसा कि लता-पताओं का भी पूजन किया। संतों से आध्यात्मिक चर्चा के लिए राष्ट्रपति नाभापीठ सुदामा कुटी दोपहर 12 बजे पहुंचीं। आश्रम संस्थापक साकेतवासी संत सुदामादास की भजन कुटी का रिमोट से लोकार्पण करने के साथ यहां विराजे ठाकुर कौशलकिशोर महाराज का पूजन किया। यहां उन्होंने गोपूजन किया और परिसर में पारिजात की पौध का रोपण किया। राष्ट्रपति की धार्मिक यात्रा का अंतिम पड़़ाव था श्रीकृष्ण जन्मस्थान। कान्हा के आंगन में प्रवेश करते ही भव्यता से वह अभिभूत हो गईं। कंस की जिस कारा में कान्हा का जन्म लिया था, उसे भी निहारती रहीं। यहां पुष्पार्चन करने के बाद उन्होंने योगमाया मंदिर, ठाकुर केशवदेव मंदिर में भी पुष्पार्चन किया। भागवत भवन में राधाकृष्ण की युगल सरकार की छवि को अपलक निहारतीं रहीं। यहां पंचोपचार विधि से उन्होंने पादुका पूजन किया।
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