हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज़ चीफ विजय सिंघल
मथुरा। यमुना के किनारे टीले पर बसी प्राचीनतम सभ्यता को संजोए हुए बस्तियों में उंचाई वाले क्षेत्रों की गलियों में गत पांच छः दिनों से मथुरा वृन्दावन महानगर के हृदय स्थल क्षेत्र छौका पाड़ा,हाथी गली में तेजी से मकानों के फटने की बड़ी घटनाएं सामने आई है, लगभग एक दर्जन मकानों में तेजी से दरारें बढ़,रही है स्थानीय निवासियों में दहशत का माहौल बन रहा है, प्रशासनिक अधिकारियों की पूर्ण उदासीनता से स्थानीय निवासियों में रोष उत्पन्न हो रहा है। ज्ञात रहे कि मथुरा की प्राचीन बस्तियां यमुना की तलहटी में स्थित टीलों पर बसी हुई है,जो कि मथुरा पुरी की प्राचीनतम सभ्यता की धरोहरों को संजोए हुए है, लगभग तीन दशकों से इस प्राचीन हृदय स्थल क्षेत्र में विभिन्न क्षेत्रों में मकानों के फटने की गम्भीर समस्या उत्पन्न होती रही है, वर्तमान में छौका पाड़ा क्षेत्र में हरदेव चतुर्वेदी, मुरलीधर, मनोज,दिनेश, संजय, सुरेश,हरी, बालगोविंद, कुलदीप एडवोकेट, संदीप चतुर्वेदी,हाथी गली में,पुनीत चतुर्वेदी, कृष्ण कुमार, सोमनाथ चतुर्वेदी आदि के मकानों में गत एक सप्ताह में तेजी से दरारें बढ़ रही हैं, स्थानीय निवासियों के अनुसार अभी तक किसी भी विभाग के अधिकारियों ने इस क्षेत्र का निरीक्षण नहीं किया है।गत दिवस भाजपा पार्षद रामदास चतुर्वेदी, होली गेट मंडल मंत्री नितिन चतुर्वेदी, सैक्टर प्रभारी शरद चतुर्वेदी ने स्थानीय निवासियों से मुलाकात कर मकान फटने की समस्या का संज्ञान लिया और स्थानीय निवासियों से टीम के साथ मुलाकात कर निरीक्षण किया, पार्षद रामदास चतुर्वेदी के अनुसार गत 2020 में नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में यह हृदय स्थल क्षेत्र की बस्तियों की इस समस्या को गम्भीरता से रखा गया, तब तत्कालीन नगर आयुक्त रविंद्र मांदड ने इन बस्तियों का स्थलीय निरीक्षण कर , अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के भू वैज्ञानिकों की टीम को बुलाया और समस्या के मूल कारणों पर निरीक्षण करवाया ।टीम ने पूरे प्राचीन शहर की टीले पर बसी बस्तियों का स्थलीय निरीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार कर बताया कि इन क्षेत्रों में प्राथमिकता के साथ वर्तमान सीवर की डेमेज लाईनों को दुरस्त किया जाये, टीले पर बसी बस्तियों में ओपन पाईप लाईन विछाकर जलापूर्ति योजना बनाई जाये, नालियों की मरम्मत कराई जाये साथ ही पुराने टूटे पड़े मकानों में वर्षा जल निकासी का उचित प्रबंध किया जाये। जिस पर नगर निगम ने कुछ ही क्षेत्रों में कार्य किये है जिसका सुंदर माडल वार्ड 57 का गताश्रम टीला ककोरन घाटी बनकर तैयार हुआ है जिसमें व्यवस्थित रूप से अंडरग्राउंड लाईटिंग,सीवर पुर्ननिर्माण, नवीन ओपन पाईप लाईन विछाकर जलापूर्ति कराईं जा रही हैं , ऐसे माडल की आज सम्पूर्ण उंचाई वाली बस्तियों में आवश्यकता है। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता से यह योजना तेजी नहीं पकड़ पाई है,और अन्य क्षेत्रों में नागरिक आज भी मकान फटने की गम्भीर समस्या से जूझ रहे हैं। भाजपा पार्षद का कहना है कि वर्तमान में नगर निगम अधिकारियो ने इस विषय को गम्भीरता से नहीं लिया है,जब कुछ हो हल्ला मचता है,तब हलचल हो जाती है। जबकि लाखों रुपए खर्च करके यह सर्वे टीम बुलाई गई थी और तत्कालीन नगर आयुक्त ने गम्भीरता से इस विषय को लिया था, लेकिन अब ऐसा प्रतीत होता है, कि वर्तमान नगर आयुक्त महोदय कार्य व्यस्तता के कारण इस क्षेत्र की ओर ध्यान ही नहीं दे पा रहे हैं ,यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया तो किसी बड़ी घटना का निमंत्रण न मिल जाए क्षेत्रीय निवासियों के लिए।
7455095736
Author: Vijay Singhal
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