हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। भले ही होम्योपैथी की ओर लोगों का रुझान बढ़ रहा हो, लेकिन जिले में संचालित 16 होम्योपैथी अस्पताल दूसरों के रहमो करम पर चल रहे हैं। जिले में कहीं भी होम्योपैथी अस्पताल के अपनी इमारत में नहीं है। कहीं पर प्रशासन तो कहीं ग्राम पंचायत के सहयोग से अस्पताल संचालित हो रहे हैं। आयुष मंत्रालय होम्योपैथी चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रही है, इसका असर लोगों पर भी दिखाई दे रहा है। लोगों का होम्योपैथी के प्रति रुझान भी बढ़ रहा है, लेकिन जिले में कहीं भी होम्योपैथी के अस्पताल अपनी इमारत में नहीं है। इसके कारण होम्योपैथी पद्धति के तहत इलाज का विस्तार नहीं हो पा रहा है। होम्योपैथी अस्पताल में चिकित्सक केवल दवा देने का कार्य कर रहे हैं, जबकि होम्योपैथी पद्धति में जांच समेत अन्य सुविधाएं भी होती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम प्रधानों द्वारा उपलब्ध कराए गए भवनों में अस्पताल संचालित हो रहे हैं। जबकि जिला होम्योपैथी अस्पताल महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल की बिल्डिंग में संचालित हो रहा है। इसी तरह कलेक्ट्रेट अस्पताल जिला प्रशासन की बिल्डिंग में चल रहा है। अस्पताल संचालित हो रहे हैं अस्पताल
जिला अस्पताल, कलेक्ट्रेट, वृंदावन, जैंत, छटीकरा, झरौंठा, अनौड़ा, नौहझील, बेरा, रैपुराजाट, कोसीकलां, नौगांव, बरसाना, नैनूपट्टी, दलौता, जाबरा में है। डॉ. ज्योति शिखा, जिला होम्योपैथी चिकित्साधिकारी ने कहा खुद की इमारत के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। समस्या यह है कि जहां पर अस्पताल हैं उसी गांव में जमीन की आवश्यकता होती है। कई ग्राम प्रधान जमीन देने के तैयार भी हो रहे हैं, लेकिन जहां जमीन चाहिए वहां उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
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Author: Vijay Singhal
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