हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। व्रन्दावन में दक्षिण भारतीय शैली के दिव्य देश रंगनाथ मन्दिर में 7 दिवसीय पवित्रोत्सव का शुभारंभ वैदिक मन्त्रोच्चार के मध्य हुए यज्ञ के साथ हुआ। श्री वैष्णव सम्प्रदाय के प्रमुख दिव्य देश रंगनाथ मन्दिर में नित्योत्सव की परंपरा रही है। उत्सवों की इस अनवरत श्रंखला में पवित्रोत्सव प्रति वर्ष अगस्त, सितम्बर के महीने में मनाया जाता है। इस उत्सव में 7 दिन तक अनवरत रूप से हवन किया जायेगा। पंचरात्र आगम पद्वति को मानने वाले दाक्षिणात्य मंदिरों में बहुत ही शास्त्रानुसार पवित्रोत्सव मनाया जाता है। किसी मंदिर में 3 दिन का किसी में 7 दिन का यह उत्सव होता है। श्री रंग मंदिर में भी यह उत्सव सात दिनों तक मनाया जायेगा। मान्यता है कि दिव्य देश स्थल के अनुसार पवित्रोत्सव तीन या सात दिनों तक आयोजित होता है। जिसमें रोज़ सुबह और शाम यज्ञ सम्पन्न होंगे। इस उत्सव में साल भर भगवान की सेवा में हुई त्रुटियों और अशुद्धियों के शुद्धिकरण के लिए दिव्य प्रबंध पाठ व वेद परायण के साथ यज्ञ किया जाता है। भगवान पीत वस्त्र धारण करके, पवित्र माला धारण कर यज्ञ के मुख्य कर्ता यजमान के रूप में विराजमान होते हैं। पीत वस्त्र धारण किये लक्ष्मी स्वरूपा हल्दी की प्रतीक है। हल्दी परम शुद्ध और स्वयं श्री लक्ष्मी हैं इसलिए श्री भगवान जो परम शुद्ध हैं , उनकी भी नगण्य से नगण्य अशुद्धता को स्पर्श मात्र से दूर कर देती है। प्रतिदिन यज्ञ पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न होते हैं। चार कुंडों में चलने वाले हवन में विभिन्न जड़ी बूटियों के साथ साथ जौ, गेंहू,तिल,धान,पुष्प , चन्दन काष्ठ, अगर समिधा ,पलास, पीपल, बेल, शमी ( छौंकर) , अंगा, खील, गौघृत आदि का प्रयोग किया जाता है । पवित्रोत्सव के सात दिनो के दौरान भगवान किसी प्रकार का आभूषण नहीं धारण करते । हवन के दौरान द्वादशाक्षर मंत्र का जाप होता है। वेदपाठी आचार्य दिव्य प्रबंध पाठ व वेद का परायण करते है।
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