मंदिर सेवायत मथुरा दास पुजारी ने बताया कि गोकुल की प्रसिद्ध होली प्रतिवर्ष मनाई जाती है। इस होली के दिन सर्वप्रथम नंद भवन नंद कला मंदिर से ठाकुर जी डोला में विराजमान कर बैंड बाजे के साथ एवं हाथी घोड़ा के साथ इस दुनिया को पूरे नगर में भ्रमण कराया जाता है। सभी गोपी एवं गोपिकाएं डोले के साथ अपने हाथों में छड़ी लेकर होली खेलने के लिए मुरलीधर घाट पर पहुंचती हैं। जहां ठाकुर जी को गुलाल लगाकर होली का शुभारंभ किया जाता है।इस दौरान राधा कृष्ण के स्वरूप के द्वारा भव्य फूलों की होली खेली जाती है। फिर अबीर गुलाल रंग उड़ाया जाता है। जिससे वहां का माहौल होली में तब्दील हो जाता है। अबीर गुलाल उड़ने के बाद आसमान में सतरंगी छटा देखने को मिलती है। मंदिर सेवायत द्वारा बताया गया कि प्रतिवर्ष इस होली का आयोजन किया जाता है। जहां इस होली का आनंद लेने के लिए देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। वहां होली के रसिया व भजन पर नाचते थिरकते हुए होली का आनंद लेते हैं। यह होली पारंपरिक रूप से मनाई जाती है। जहां प्रशासन के द्वारा भी दुरुस्त व्यवस्थाएं की जाती है।
