हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। बरसाना में उत्तर प्रदेश की तीर्थनगरी मथुरा में चंहुओर होली की धूम रही। अपने आराध्य के दर्शन की अभिलाषा विश्वभर से श्रद्धालु पहुंचे। यहां उन्होंने होली उत्सव का जमकर आनंद लिया। इसके साथ ही बृषभान नंदनी के निज धाम बरसाना होली के धमार का समापन बुधवार को ‘जो जीवैगो सो खेलेगौ, ढप धर दै यार गई अगले बरस की’ पद के साथ हो गया। पद के अनुसार, समाज गायन में उपयोग आने वाली ढप का वर्णन है। इसमें यह भाव है कि ढप को अब सुरक्षित धर दें, जो अगली साल तक जीयेगा वो इस ढप को बजाएगा। इस दौरान राधारानी ने अपने गर्भगृह से बाहर निकलकर मंदिर परिसर में स्थित सफेद छतरी में विराजमान होकर अपने भक्तों पर कृपा का सागर उड़ेला। इस उत्सव की शुरुआत बंसत पंचमी के दिन से होती है और यह उत्सव चालीस दिन तक चलता है। बरसाना में होने वाली प्रसिद्ध लड्डू व लठामार होली के साथ फाग महोत्सव का शुभारंभ बंसत के दिन लाडली जी मंदिर में ध्वजरूपी डाड़ा गाड़कर किया जाता है। चालीस दिवसीय इस होली महोत्सव के आनंद के रंग में श्रद्धालु बड़े भाव से राधाकृष्ण की इन लीलाओं का आनंद लेते हैं। गोस्वामी समाज के लोगों द्वारा मंदिर परिसर में फाग महोत्सव का अंतिम पद जीवेगो सो खेलेगो….. गाकर चलीस दिवसीय होली धमार का समापन कर दिया गया। इसके बाद ढप, मृदंग, झांझ आदि को अगले साल के लिए उठाकर रख दिया। वहीं शाम पांच बजे बृषभान नंदनी के डोला को सेवायत कंधों पर उठाकर मंदिर परिसर में बनी संगमरमर की सफेद छतरी में विराजमान किया। होली महोत्सव के अंतिम दिन राधाकृष्ण के युगल जोड़ी के दर्शनकर श्रद्धालु अपने आपको कृतार्थ मान रहे थे। गोस्वामी समाज के लोगों द्वारा मंदिर परिसर में फाग महोत्सव का अंतिम पद जीवेगो सो खेलेगो….. गाकर चलीस दिवसीय होली धमार का समापन कर दिया गया। इसके बाद ढप, मृदंग, झांझ आदि को अगले साल के लिए उठाकर रख दिया। वहीं शाम पांच बजे बृषभान नंदनी के डोला को सेवायत कंधों पर उठाकर मंदिर परिसर में बनी संगमरमर की सफेद छतरी में विराजमान किया। होली महोत्सव के अंतिम दिन राधाकृष्ण के युगल जोड़ी के दर्शनकर श्रद्धालु अपने आपको कृतार्थ मान रहे थे।
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Author: Vijay Singhal
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