हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। श्री कृष्ण जन्मस्थान शाही ईदगाह मामले में गुरुवार को मथुरा कोर्ट में सुनवाई हुई। सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में दाखिल 12 वाद पर दोनों पक्षों की तरफ से 2 घंटे तक बहस हुई। जिसके बाद कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 12 जुलाई नियत कर दी। वहीँ आगरा की बेगम साहिबा मस्जिद के अमीन सर्वे को लेकर श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह द्वारा दाखिल वाद पर मुस्लिम पक्ष द्वारा उनको सुनने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। इस पर सिविल जज सीनियर डिवीजन फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट ने 6 जुलाई को निर्णय ले सकता है। आगरा की बेगम साहिबा मस्जिद के अमीन सर्वे को लेकर गुरुवार को मथुरा कोर्ट को निर्णय लेना था। लेकिन निर्णय लेने से पहले मुस्लिम पक्ष ने 1/10 का प्रार्थना पत्र जिसमें दाखिल वाद में उनको भी पक्ष रखने का मौका देने की मांग की जाती है रखा। इसके बाद सिविल जज सीनियर डिवीजन फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट ने 6 जुलाई की तारीख नियत कर दी। संभावना है कि 6 जुलाई को कोर्ट आगरा की बेगम साहिबा मस्जिद के अमीन सर्वे को लेकर कोई निर्णय ले। 17 अप्रैल को सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में अमीन सर्वे कराने के लिए श्री कृष्ण जन्म भूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह ने प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था। इसमें वादी ने कहा, यह हिंदुओं की आस्था का विषय है। आज भी लोग उन सीढ़ियों से होकर निकलते हैं, जिससे भावनाएं आहत हो रही हैं। उन सीढ़ियों से आवाजाही पर तत्काल रोक लगाई जाए और विवादित स्थल का अमीन सर्वे कराया जाए। कोर्ट ने 25 मई को सुनवाई की अगली तारीख दी थी। दरअसल, 23 दिसंबर 2022 को मथुरा के सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में वाद दायर हुआ था। भगवान केशव देव को वादी बनाते हुए श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह और श्यामानंद पंडित ने यह वाद दाखिल किया था। इसमें दावा किया गया था कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर की बेशकीमती मूर्तियां आगरा लाल किले के दीवाने खास के पास बनी बेगम साहिबा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दबी हैं। औरंगजेब के शासन काल के दौरान मथुरा में बने भगवान श्रीकृष्ण के भव्य मंदिर को तहस-नहस कर दिया गया था। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह ने यूनियन ऑफ इंडिया के केंद्रीय सचिव, आर्किलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के जनरल डायरेक्टर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा के अधीक्षक और निदेशक मथुरा को प्रतिवादी बनाया था। जिसमें प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता खरग सिंह ने दावा को निराधार बताते हुए खारिज करने की मांग की थी। खरग सिंह ने कोर्ट से कहा कि इस तरह के दावे दायर करते रहते हैं। जिसके बाद मंदिर से भगवान के विभिन्न विग्रह (मूर्तियों) को आगरा ले जाया गया और उन्हें जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दबा दिया गया। वादी ने मांग की है कि आगरा की जामा मस्जिद की सीढ़ियों से प्रतिमाओं को निकालकर भगवान श्रीकृष्ण के मूल जन्मस्थान में स्थापित किया जाए। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह ने यूनियन ऑफ इंडिया के केंद्रीय सचिव, आर्किलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के जनरल डायरेक्टर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा के अधीक्षक और निदेशक मथुरा को प्रतिवादी बनाया था। जिसमें प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता खरग सिंह ने दावा को निराधार बताते हुए खारिज करने की मांग की थी। खरग सिंह ने कोर्ट से कहा कि इस तरह के दावे दायर करते रहते हैं। 11 मई को कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर ने आगरा की जामा मस्जिद की सीढ़ियों की खुदाई के लिए याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने मामला स्वीकार कर लिया था। जवाब देने के लिए जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी, छोटी मस्जिद, दीवाने खास, जहांआरा मस्जिद, आगरा किला, यूपी सेंट्रल वक्फ बोर्ड लखनऊ और श्रीकृष्ण सेवा संस्थान को नोटिस भेजा। सभी पक्षों को 31 मई तक अपना पक्ष रखना है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट इस पर फैसला सुना सकता है।
सीढ़ियों के नीचे श्रीकृष्ण की मूर्ति का दावा
कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर का दावा है कि आगरा की जामा मस्जिद में जो सीढ़ियां बनी हैं, उनके नीचे श्रीकृष्ण भगवान की मूर्तियां हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में देवकीनंदन ने कहा, ”पहले हमारे देश में बाहर से आए मुगल आक्रांताओं ने सनातन धर्म और हिंदू संस्कृति को नुकसान पहुंचाने और अपमानित करने के काम किए थे। 1670 में औरंगजेब ने मथुरा में हिंदू जनमानस के आराध्य भगवान श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर प्राचीन ठाकुर केशव देव मंदिर को तोड़कर उस स्थान पर मस्जिद बनवा दी थी। उन्होंने बताया, ”औरंगजेब ने केशवदेव मंदिर की मूर्तियों को आगरा की जामा मस्जिद (जहां आरा बेगम मस्जिद छोटी मस्जिद) की सीढ़ियों के नीचे दबा दिया। सनातन धर्म और हिंदुओं को अपमानित करते हुए मुस्लिम लोग इन सीढ़ियों पर चढ़कर मस्जिद में जाते हैं। हमारे आराध्य भगवान की पवित्र मूर्तियों आज भी पैरों के नीचे रौंदी जा रही हैं।” गुरुवार को मथुरा की सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में श्री कृष्ण जन्मस्थान शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर दाखिल 12 वाद पर भी सुनवाई की। कोर्ट ने हरी शंकर जैन ,महेंद्र प्रताप सिंह, दिनेश शर्मा,मनीष यादव,पवन शास्त्री,आशुतोष पांडे,अनिल त्रिपाठी आदि के द्वारा श्री कृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ जमीन मुक्त कराने के लिए दाखिल वाद पर सुनवाई की। कोर्ट में हिन्दू पक्षकार और मुस्लिम पक्ष की तरफ से करीब 2 घंटे बहस की। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि कोर्ट पहले केस के मेंटेबल और नॉन मेंटेबल यानि 7 रूल 11 पर सुनवाई करे। इसके साथ ही मुस्लिम पक्ष ने वर्शिप एक्ट का भी हवाला दिया। जिस पर हिन्दू पक्षकारों ने कहा कि इस मामले में वर्शिप एक्ट लागु नहीं होता। वरिष्ठ अधिवक्ता और वादी हरी शंकर जैन ने बताया कि हाई कोर्ट ने केस को रिमांड कर दिया जिसके बाद आज कोर्ट आये। मुस्लिम पक्ष चाहता है कि 7 रूल 11 पर सुनवाई हो। कोर्ट ने अब सभी श्री कृष्ण जन्मस्थान से संबंधित जितने केस हैं उस पर 12 जुलाई को सुनवाई करेगा।
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