हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। जाट वोट बैंक के सहारे फिर रालोद सियासी ”ठाठ” की जुगत में है। भाजपा से गठबंधन की चर्चाओं के बीच रालोद के खाते में मथुरा की लोकसभा सीट देने की पेशकश की चर्चा तेज हो गई है। आइएनडीआइए गठबंधन में भी मथुरा लोकसभा सीट रालोद के खाते में आई है। ऐसे में जाट बाहुल्य इस सीट पर रालोद भाजपा से गठबंधन के बाद भी अपनी दावेदारी नहीं छोड़ना चाहेगा। यदि ऐसा हुआ, तो वर्तमान सांसद हेमा मालिनी के तीसरी बार संसद पहुंचने की राह भी मुश्किल होगी। फिलहाल रालोद आइएनडीआइए गठबंधन में शामिल है। पिछले दिनों गठबंधन की बैठक में रालोद को मथुरा लोकसभा सीट दी गई। इसके पीछे बड़ा कारण ये है कि खुद रालोद मुखिया जयन्त चौधरी यहां से 2009 में सांसद रहे। 2012 में मांट विधानसभा से लगातार विधायक रहे श्याम सुंदर शर्मा का किला ढहाकर विधायक बने। पूर्व में इसी जिले से उनकी दादी गायत्री देवी गोकुल से विधायक रह चुकी हैं। हालांकि चौधरी अजित सिंह की बहन ज्ञानवती यहां से लोकसभा चुनाव हार चुकी हैं। वर्तमान में जाट हेमा मालिनी दो बार से सांसद हैं। वह तीसरी बार भी यहां से संसद जाना चाहती हैं। इसके अलावा प्रमुख जाट नेता जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी, पूर्व सांसद तेजवीर सिंह आदि भी चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर रहे हैं। वर्तमान में मथुरा भाजपा का गढ़ है। पांचों विधानसभा सीटों के साथ ही लोकसभा सीट भी उसी के पास है। करीब साढ़े तीन से चार लाख जाट मतदाता हैं। ये रालोद की बढ़ी ताकत हैं, हालांकि इसमें बड़ा हिस्सा भाजपा के पास है। ऐसे में भाजपा से गठबंधन कर मथुरा से चुनाव लड़ने में रालोद को ये सीट काफी फायदेमंद दिखाई दे रही है।हमें भाजपा से गठबंधन की चर्चाओं की जानकारी नहीं है। रालोद मथुरा में बहुत मजबूत स्थिति में है। गठबंधन किसी से हो हम पूरी दमदारी से चुनाव लड़ेंगे और ये सीट जीतेंगे। हमें भाजपा से गठबंधन की चर्चाओं की जानकारी नहीं है। रालोद मथुरा में बहुत मजबूत स्थिति में है। गठबंधन किसी से हो हम पूरी दमदारी से चुनाव लड़ेंगे और ये सीट जीतेंगे।
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Author: Vijay Singhal
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