हिदुस्तान 24 टीबी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। मथुरा नगर निगम में बैकलॉग कोटे से नगर निगम में सफाईकर्मी नियुक्त होने के बाद कथित तौर पर नियम विरुद्ध पदोन्नति पाकर बाबू बने नगर आयुक्त के पीए होशियार सिंह ने अपने रसूख के चलते सरकारी आवास भी आवंटित करवा लिया, जिसका नाममात्र किराया है। ताज्जुब इस बात का है कि जिस आवास को आवंटित किया गया है, उसमें रह रहे कनिष्ठ अभियंता का मथुरा से तबादला होना बताया है, जबकि वह मथुरा में ही तैनात है। पार्षद राजवीर सिंह, तेजवीर सिंह, नीरज वशिष्ठ, विकास दिवाकर, सुभाष यादव व अन्य की ओर से मंडलायुक्त को दी शिकायत में होशियार सिंह की नियम विरुद्ध पदोन्नति पर तो सवाल उठाए ही गए थे, उसे तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त द्वारा 16 दिसंबर 2022 को जलकल कंपाउंड के भीतर सरकारी आवास आवंटन की भी जांच की मांग की गई थी। मंडलायुक्त ने जांच करवाने के बाद विगत 12 फरवरी को नगर आयुक्त को पत्र भेजकर होशियार सिंह की पदोन्नति निरस्त करने की कार्रवाई कर अवगत करवाने को कहा, लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पार्षदों का आरोप है कि आवास आवंटन मामले में तो पूरा खेल हुआ है। होशियार सिंह को जलकल कंपाउंड के भीतर जो आवास आवंटित किया गया है, उसमें पहले अवर अभियंता छत्रपाल सिंह रहते थे। पार्षदों का आरोप है कि मंडलायुक्त के आदेश पर अपर आयुक्त (प्रशासन) द्वारा की गई जांच में नगर निगम के अधिकारियों ने वास्तविक तथ्य छिपाकर उन्हें गुमराह करने का प्रयास किया है। जलकल कंपाउंड के भीतर सरकारी आवास आवंटित किए जाने के बिंदु पर जवाब दिया गया है कि इस आवास में रह रहे अवर अभियंता छत्रपाल सिंह का स्थानांतरण हो जाने के बाद उनके नाम का आवास होशियार सिंह को आवंटित किया है, जबकि हकीकत में छत्रपाल सिंह का स्थानांतरण नहीं हुआ है। वे मथुरा में ही एक कॉलोनी में महंगे किराये पर मकान लेकर रह रहे हैं। जबकि सरकारी आवास में महज 300 रुपये प्रतिमाह के अलावा निर्धारित बिजली बिल ही देना पड़ता है। शशांक चौधरी, नगर आयुक्त, ने कहा इस प्रकरण में अपर आयुक्त की जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। एक सप्ताह के अंदर इस रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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Author: Vijay Singhal
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