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मथुरा में साइबर ठगी के मामले में चार बैंक कर्मी निलम्बित

ByVijay Singhal

Dec 26, 2025
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। बैंक आफ महाराष्ट्र की कृष्णानगर शाखा के दर्जनों एकाउंट से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के मामले की विवेचना के दौरान बैंककर्मियों की मिली भगत प्रकाश में आयी है। बैंक के चार कर्मियों के साथ आउट सोर्सेस पर काम करने वालों के नाम भी सामने आए हैं। बैंक के उच्चाधिकारियों ने जांच के बाद चार कर्मियों को निलंबित कर दिया है। इस प्रकरण की जांच अभी साइबर पुलिस कर रही है। इसमें प्रकाश में आने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बताते चलें कि हाइवे थानांतर्गत नगला मेवाती निवासी दर्जनों ग्रामीणों के वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत कृष्णानगर स्थित बैंक आफ महाराष्ट्र शाखा में जीरो बैलेंस के खाते खुलवाए गए थे।
इसमें नगला मेवाती निवासी दिलशाद का भी खाता था। उसने नौकरी से मिली सैलरी के 15 हजार रुपये अपने इसी खाते में डलवाये थे। 22 नवंबर को जब वह रुपये निकालने गया तो उसे पता चला कि उसका खाता फ्रीज कर दिया गया है। उसमें से साइबर ठगी से रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ है। इस पर पीड़ित दिलाशाद ने कोतवाली पुलिस से शिकायत की। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विनोद बाबू मिश्रा, साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक रफत मजीद ने टीम के साथ बैंक पहुंच मामले की जांच की। करोडों की ठगी प्रकाश में आने पर कोतवाली प्रभारी ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की विवेचना साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक रफत मजीद द्वारा की जा रही है। बताते हैं कि उन्होंने जांच के दौरान पाया कि आधा दर्जन लोगों के स्थानीय स्तर पर बैंककर्मियों ने खाते में दूसरे मोबाइल नंबर दर्ज कराकर एटीएम कार्ड बनाये। इनके माध्यम से रुपयों का ट्रांजेक्शन हुआ है। विवेचना में अभी तक चार बैंककर्मियों के नाम प्रकाश में आये हैं। मामला संज्ञान में आने पर बैंक उच्चाधिकारियों ने चारों को निलंबित कर दिया है। साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक रफत मजीद ने बताया कि बैंक से की गयी साइबर ठगी के मामले की विवेचना की जा रही है। इसमें कई बैंक कर्मियों के नाम प्रकाश में आये हैं। इनके द्वारा एटीएम कार्ड बनाये गये हैं। मामले की विवेचना की जा रही है। जांच में आगे भी जो शामिल होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। खाताधारक को पता नहीं, बदल दिये मोबाइल नंबर गौरतलब है कि इस मामले में बड़ा खेल हुआ। खाताधारकों को पता नहीं चला और उनके मोबाइल नंबर बदल दिये गये। यही नहीं उनके खाते से एटीएम भी बनाकर जारी कर दिये। जबकि खाताधारक द्वारा एप्लीकेशन दिये बगैर मोबाइल नंबर नहीं बदला जा सकता। इस बदले हुए मोबाइल नंबर और एटीएम को साइबर ठगों ने ठगी में प्रयोग किया के दर्जनों एकाउंट से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के मामले की विवेचना के दौरान बैंककर्मियों की मिली भगत प्रकाश में आयी है। बैंक के चार कर्मियों के साथ आउट सोर्सेस पर काम करने वालों के नाम भी सामने आए हैं। बैंक के उच्चाधिकारियों ने जांच के बाद चार कर्मियों को निलंबित कर दिया है। इस प्रकरण की जांच अभी साइबर पुलिस कर रही है। इसमें प्रकाश में आने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बताते चलें कि हाइवे थानांतर्गत नगला मेवाती निवासी दर्जनों ग्रामीणों के वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत कृष्णानगर स्थित बैंक आफ महाराष्ट्र शाखा में जीरो बैलेंस के खाते खुलवाए गए थे। इसमें नगला मेवाती निवासी दिलशाद का भी खाता था। उसने नौकरी से मिली सैलरी के 15 हजार रुपये अपने इसी खाते में डलवाये थे। 22 नवंबर को जब वह रुपये निकालने गया तो उसे पता चला कि उसका खाता फ्रीज कर दिया गया है। उसमें से साइबर ठगी से रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ है। इस पर पीड़ित दिलाशाद ने कोतवाली पुलिस से शिकायत की। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विनोद बाबू मिश्रा, साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक रफत मजीद ने टीम के साथ बैंक पहुंच मामले की जांच की। करोडों की ठगी प्रकाश में आने पर कोतवाली प्रभारी ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की विवेचना साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक रफत मजीद द्वारा की जा रही है। बताते हैं कि उन्होंने जांच के दौरान पाया कि आधा दर्जन लोगों के स्थानीय स्तर पर बैंककर्मियों ने खाते में दूसरे मोबाइल नंबर दर्ज कराकर एटीएम कार्ड बनाये। इनके माध्यम से रुपयों का ट्रांजेक्शन हुआ है। विवेचना में अभी तक चार बैंककर्मियों के नाम प्रकाश में आये हैं। मामला संज्ञान में आने पर बैंक उच्चाधिकारियों ने चारों को निलंबित कर दिया है। साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक रफत मजीद ने बताया कि बैंक से की गयी साइबर ठगी के मामले की विवेचना की जा रही है। इसमें कई बैंक कर्मियों के नाम प्रकाश में आये हैं। इनके द्वारा एटीएम कार्ड बनाये गये हैं। मामले की विवेचना की जा रही है। जांच में आगे भी जो शामिल होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। खाताधारक को पता नहीं, बदल दिये मोबाइल नंबर गौरतलब है कि इस मामले में बड़ा खेल हुआ। खाताधारकों को पता नहीं चला और उनके मोबाइल नंबर बदल दिये गये। यही नहीं उनके खाते से एटीएम भी बनाकर जारी कर दिये। जबकि खाताधारक द्वारा एप्लीकेशन दिये बगैर मोबाइल नंबर नहीं बदला जा सकता। इस बदले हुए मोबाइल नंबर और एटीएम को साइबर ठगों ने ठगी में प्रयोग किया।
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Author: Vijay Singhal

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