हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। व्रन्दावन में मंदिरों से लेकर गलियों और परिक्रमा मार्ग तक गुलाल उड़ता रहा और देश-विदेश से आए श्रद्धालु ब्रज की परंपरागत होली का आनंद लेते दिखाई दिए। विदेशी भक्तों ने इसे केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मिक आनंद और आध्यात्मिक अनुभूति बताया। रंगभरनी एकादशी पर उमड़ी श्रद्धा की लहर शनिवार को भी कम नहीं हुई। सुबह से ही बांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र, इस्कान मंदिर, परिक्रमा मार्ग और प्रमुख मंदिरों के आसपास श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। ढोल-मंजीरों की थाप, भजन-कीर्तन और राधे-राधे के जयघोष के बीच श्रद्धालु एक-दूसरे पर गुलाल उड़ाते नजर आए। विदेशी श्रद्धालु समूहों में ब्रज की होली को करीब से अनुभव करते दिखे। कई भक्त मंदिर-मंदिर दर्शन करते हुए आगे बढ़ते रहे तो कुछ स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ नृत्य करते हुए उत्सव में शामिल हुए। टेसू के फूलों से बने प्राकृतिक रंग और पारंपरिक गुलाल के साथ खेली जा रही होली विदेशी मेहमानों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट से आई मिलिंदा, इरेंका, एनी और एमेलिया ने बताया कि उनके देश में इस्कान भक्तों द्वारा कृष्ण भक्ति का प्रचार तेजी से बढ़ रहा है। इसी प्रेरणा से वे पहली बार वृंदावन पहुंची हैं।देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि ब्रज की होली अब केवल क्षेत्रीय उत्सव नहीं रही, बल्कि दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करने वाला सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्व बन चुकी रूस के मास्को से आईं पदमी और लीला ने बताया कि वृंदावन उन्हें हर बार अपनी ओर खींच लाता है। यहां का आध्यात्मिक वातावरण मन को शांति देता है। लीला ने कहा कि वह इस्कान से जुड़ी भक्त हैं और कृष्ण भक्ति ने उनके जीवन को नई दिशा दी है।
