मथुरा। मांट के गांव जाबरा में जेठ और भाभी की होली होती है। यहां राधाजी अपने जेठ बलराम संग जेठ-भाभी की होली खेली थी।नमान्यता है कि फाल्गुन माह के उल्लास और श्रीकृष्ण के अग्रज ब्रज के बलरामजी ने जेठ होकर राधारानी से भाभी और देवर के समान होली खेलने की अभिलाषा व्यक्त की। राधाजी यह बात सुन कर विचलित हुईं और श्रीकृष्ण से कहा तो वे मुस्कराकर बोले कि त्रेता युग में बलराम लक्ष्मण थे, आप सीता के साथ रूप में उनकी भाभी थीं। उसी नाते से भाभी कह दिया होगा। मांट तहसील मुख्यालय से 4 किमी दूर स्थित गांव जाबरा में चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा को सुबह कजरा होता है। इसमें ब्रजवासियों के साथ हुरियारे गाते-बजाते गांव की परिक्रमा करते हैं। गांव के वयोवृद्ध लोगों का दल कजरा के पीछे-पीछे ब्रजभाषा के प्राचीन होली के लोक गीतों को ऊंचे स्वरों में गाते हुए चलते हैं। हुरंगा से पूर्व गांव में छोटे-छोटे पहलवानों का दंगल होता है। शाम को गांव के बाहर मैदान में ब्रज के होली रसियों के गायन के साथ जेठ और भाभी के बीच विशाल हुरंगा और फिर गांव की परिक्रमा की जाती है। द्वितीया तिथि को जाबरा के गांव चंद्रवन में मेले का आयोजन किया जाता है। इसमें आने वाले गांवों के लोग अपने-अपने गांव का नगाड़ा लेकर आते हैं। यहां रसियों और नगाड़ों की तान पर लोग जमकर नृत्य करते हैं। नगाड़े की ताल पर बुजुर्ग करतब दिखाते हैं। जाबरा भन्नी पर विशाल दंगल का आयोजन भी किया जाता है।
7455095736
Author: Vijay Singhal
50% LikesVS
50% Dislikes
