हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। व्रन्दावन में अक्षय नवमी के नाम से प्रसिद्ध कार्तिक शुक्ल नवमी को मथुरा, वृंदावन की परिक्रमा लगाई जा रही है। 14 कोस की परिक्रमा देने के लिए रात से ही श्रद्धालुओं का सैलाब परिक्रमा मार्ग में उमड़ पड़ा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु अक्षय पुण्य की प्राप्ति के लिए 3 वन वृंदावन,मथुरा और गरुड़ गोविंद की परिक्रमा दे रहे हैं।
मान्यता है कि कार्तिक महात्मय के बाद जब धरती से जीव आदि की समाप्ति हो गई तब ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए जप किया। ब्रह्मा जी के जप से प्रसन्न हो कर भगवान विष्णु ने कहा कि आपकी सभी मुराद पूरी हों। जिसके बाद ब्रह्मा जी के प्रसन्नता के कारण आंसू निकल आए और आंसू की बूंद पृथ्वी पर गिरने लगी। इन्हीं आंसू की बूंदों से आंवला का पेड़ बना जिसे पृथ्वी की सबसे पहली वनस्पति कहा जाता है। अक्षय नवमी के दिन इसका स्मरण करने से गोदान का फल मिलता है।

अक्षय नवमी पर्व के बारे में कहा जाता है कि इसी दिन से सतयुग की शुरुआत हुई थी। इस दिन पावन नगरी,देवालयों की परिक्रमा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन ब्रज में वृंदावन,मथुरा और गरुड़ गोविंद की परिक्रमा लगाई जाती है। अक्षय नवमी पर्व पर परिक्रमा देने के लिए देर रात से ही परिक्रमार्थी परिक्रमा मार्ग में उमड़ने लगे। वृंदावन के युगल घाट, अटला चुंगी, रमनरेती से परिक्रमा भक्तों ने शुरू कर दी। जिसके बाद वह 5 कोस की वृंदावन,5 कोस की मथुरा और 4 कोस की गरुड़ गोविंद की परिक्रमा देने लगे। पूरे 14 कोस यानी 42 किलोमीटर में परिक्रमार्थी ही परिक्रमार्थी नजर आ रहे थे।
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Author: Vijay Singhal
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