हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। जनपद में यूरिया की उपलब्धता सहकारी समितियों पर शून्य हो गई है। पिछले 10 दिन से सहकारी समितियों में यूरिया उपलब्ध नहीं है। जहां उपलब्ध है वे यूरिया के साथ कई अन्य उत्पाद किसानों को जबरन दे रहे हैं। ऐसे में किसान यूरिया के लिए दुकानों की ओर दौड़ रहा है। यहां उसे 83 रुपये महंगे यूरिया की खरीद मजबूरी में करनी पड़ रही है। मथुरा। जनपद में यूरिया की उपलब्धता सहकारी समितियों पर शून्य हो गई है। पिछले 10 दिन से सहकारी समितियों में यूरिया उपलब्ध नहीं है। जहां उपलब्ध है वे यूरिया के साथ कई अन्य उत्पाद किसानों को जबरन दे रहे हैं। ऐसे में किसान यूरिया के लिए दुकानों की ओर दौड़ रहा है। यहां उसे 83 रुपये महंगे यूरिया की खरीद मजबूरी में करनी पड़ रही है। वर्तमान में जनपद में गेहूं, आलू और सरसों की फसल में यूरिया का उपयोग सिंचाई के साथ किया जा रहा है। इससे यूरिया की खपत फिर बढ़ गई है। हालांकि कृषि अधिकारियों का दावा है कि जनपद में यूरिया आवश्यकता के अनुरूप मौजूद है। 7 हजार मीट्रिक टन बिक्री केंद्रों पर उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त 3 हजार मीट्रिक टन रिजर्व है, जिसमें से 300 मीट्रिक टन यूरिया प्रतिदिन सहकारी समितियों को भेजा जा रहा है। हालांकि वास्तविकता इसके विपरीत है। जनपद में सहकारी समितियां यूरिया खाद की दृष्टि से खाली हैं। 10 दिन से तो एक कट्टा यूरिया गोवर्धन, फरह, राया, बलदेव, महावन क्षेत्र में गया नहीं है। आलू, गेहूं और सरसों की फसल से जुड़े इस क्षेत्र में किसान को मजबूरी में अपनी आवश्यकता को पूरा करने के लिए खुले बाजार से यूरिया की खरीद करनी पड़ रही है। कहा यह भी जा रहा है कि जिन सहकारी समितियों पर यूरिया की उपलब्धता है, वहां किसानों पर नैनो यूरिया तथा माइक्रो मिक्चर खरीदने के लिए दबाव दिया जाता है। दुकानदार भी यूरिया की सीमित उपलब्धता को देखते हुए मनमाफिक दाम किसानों से वसूल रहे हैं। 266.50 रुपये का कट्टा खुले बाजार में 350 रुपये तक बिक रहा है। प्राइवेट क्षेत्र में भी इस बार सीमित मात्रा में ही खाद है। वर्तमान में 4500 मीट्रिक टन यूरिया की उपलब्धता निजी क्षेत्र में बताई जा रही है। 500 मीट्रिक टन और अलीगढ़ से रोड मार्ग द्वारा मथुरा आ रहा है। दुकानदारों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से खाद मथुरा के बजाए अलीगढ़ और आगरा से मंगाई जा रही है। इससे रोड किराए का अतिरिक्त भार पड़ रहा है। इसके कारण खाद महंगा पड़ रहा है। जिला कृषि अधिकारी अश्वनी कुमार सिंह ने बताया कि वर्तमान आवश्यकता के अनुरूप यूरिया जनपद में मौजूद है। आगे के लिए डिमांड की जा रही है।
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Author: Vijay Singhal
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