हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। सुरीर में करवा चौथ पर महिलाएं सोलह शृंगार कर अपने पति के लिए व्रत रखेंगी। आसमान के बाद अपने चांद का दीदार करेंगी। वहीं सती के श्राप के कारण कस्बे के मोहल्ला बघा में महिलाएं करवा चौथ नहीं मनाएंगी। यहां परंपरा के कारण नव विवाहिताओं को सुहाग की दीर्घायु के लिए व्रत नहीं रख पाने का मलाल रहता है। बघा निवासी बबिता सिंह ने बताया कि बीस साल पूर्व विवाह कर गांव आयीं थीं। सालों से चली आ रही परंपरा और मैया के श्राप के चलते करवा चौथ का व्रत रखने का मलाल है। सीमा, पूनम, आरती का कहना है कि शादी के बाद पड़ने वाली पहली करवा चौथ पर अपने पतियों की दीर्घ आयु के लिए व्रत रखने की तमन्ना थी। जब पता चला कि माता के श्राप के चलते ऐसा नहीं कर पाएंगी तो तमन्ना अधूरी रह गई। श्राप की परंपरा को तोड़ने की किसी ने आज तक हिम्मत नहीं जुटाई। वर्षों पूर्व थाना नौहझील के गांव रामनगला का युवक अपनी पत्नी को ससुराल से भैंसा बुग्गी से लेकर लौट रहा था। मोहल्ला बघा के कुछ लोगों ने भैंसा बुग्गी को रोक लिया और भैंसे को अपना बताते हुए विवाद खड़ा कर दिया। मारपीट में युवक की मौत हो गई। युवक की पत्नी ने सती होने से पहले श्राप दिया कि जिस तरह से उसके सामने उसके पति की मौत हुई है। वह श्राप देती हैं कि किसी विवाहिता ने शृंगार कर पति के लिए व्रत रखा तो विधवा हो जाएगी। यहां तक की बच्चों की सलामती के लिए अहोई अष्टमी का भी व्रत भी महिलाएं नहीं रखती हैं। उधर गांव रामनगला के पंडित जाति के लोग सुरीर के लोगों के यहां का पानी तक नहीं पीते हैं।
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Author: Vijay Singhal
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