हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। व्रन्दावन पुलिस की कथित “गुडवर्क” की होड़ ने दो निर्दोष लोगों की ज़िंदगी के 10 कीमती साल छीन लिए। युवती की हत्या के आरोप में जिन दो लोगों को पुलिस ने जेल भेज दिया था, वह युवती बाद में जिंदा बरामद हो गई। अदालत ने दोनों को बाइज्जत बरी कर दिया है। दोनों को खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए पूरे 10 वर्ष तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद दोनों आरोपियों ने अपने स्तर पर युवती की तलाश शुरू की और अंततः उसे खोजकर पुलिस के माध्यम से न्यायालय में पेश कराया। अदालत ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए युवती की हत्या के झूठे केस में दोनों को फंसाने वाले तत्कालीन वृंदावन कोतवाली प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में अदालत ने पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। यह मामला पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आरती गुप्ता के जीवित बरामद होने के बाद अदालत में उसके बयान कराए गए। एडीजे छह नीलम ढाका ने भगवान सिंह व सोनू सैनी को बा-इज्जत बरी करते हुए विवेचक उदय प्रताप सिंह (तत्कालीन कोतवाली प्रभारी वृंदावन) द्वार झूठी सीडीआर अदालत में पेश करने तथा दोषपूर्ण विवेचना करने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए पुलिस महानिदेशक यूपी पुलिस को कार्रवाई के लिए लिखा है। अदालत ने लिखा है कि विवेचक का कृत्य सीधे तौर पर मानव अधिकारों के उल्लंघन का ज्वलंत उदाहरण है।
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Author: Vijay Singhal
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