हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। व्रन्दावन में कृष्णभक्ति में समर्पित इस्कॉन के प्रमुख प्रचारक अक्रूर जी महाराज ने रामचरित मानस को फाड़ने, उस पर टिप्पणी करने वालों को अशोभनीय बताया। उन्होंने कहा कि धर्मग्रंथ कोई भी हो, किसी भी धर्म का हो, उसका अपमान निंदनीय है। कनाडा से आए कृष्ण भक्त अक्रूर महाराज ने कहा ऐसे निंदाजनक लोगों पर एक्शन होना जरूरी है। कृष्णभाव में बरसों से रमे अक्रूर जी महाराज इस्कॉन के वरिष्ठ प्रचारक हैं। रविवार को मेरठ में इस्कॉन सेंटर शास्त्रीनगर के शुभारंभ अवसर पर पहुंचे। यहां उन्होंने दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत में धर्मग्रंथों के अपमान पर दुख जताया। अक्रूर प्रभु महाराज ने कहा कि सभी धर्मों और सभी ग्रंथों का मान सम्मान रखना चाहिए, अगर कोई भी धर्म के लोग किसी भी धर्म की पुस्तक या ग्रंथ को फाड़ने का काम करते हैं। किसी भी धर्मग्रंथ का अपमान करते हैं, उन पर एक्शन होना चाहिए। कहा कि हम किसी का सम्मान नहीं कर सकते तो मत करो। आगे वो कहते हैं कि किसी भी धर्मग्रंथ को फाड़ो भी मत वो गलत है, ये निंदनीय है। ऐसे लोगों पर एक्शन जरूरी है। कहते हैं एक ज्ञान गुरु से आता है एक ज्ञान भगवत गीता से आता है। गीता समान है, लेकिन उसकी व्याख्या है वो सबकी अलग अलग है। हम इस्कॉन की अपनी गीता को प्रमाणिक कहते हैं। क्योंकि हमारे गुरु ने अपने गुरु से उनके गुरु से सीखा। इसलिए हम इस्कॉन की भगवत गीता को प्रमाणिक कहते हैं। वो वही बताती है जो कृष्ण कहते थे। अक्रूर जी ने बताया कि गाजियाबाद बेव सिटी में इस्कॉन का बड़ा सेंटर बनने जा रहा है। बरेली, मुरादाबाद, सहारनपुर में भी इस्कॉन का बड़ा प्रचार केंद्र तैयार हो रहा है। पूरे यूपी और भारत की बात करें तो आने वाले 2 सालों में इस्कॉन के 100 नए केंद्र बनने जा रहे हैं। जिन पर लगातार काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि मेरठ में हमारा ये नया एजुकेशनल सेंटर प्रारंभ हुआ है। यहां हम भगवत गीता के बारे में बताते हैं। पढ़ाते हैं। लोगों को दोबारा कैसे वैदिक धर्म, परंपरा और सनातन परंपरा से जोड़ा जाए इसकी हम शिक्षा देते हैं। महिलाओं, पुरुषों, बच्चों सभी को संस्कारों की शिक्षा देते हैं। अक्रूर जी महाराज इस्कॉन के वरिष्ठ प्रचारक हैं। मूल रूप से कनाडा वासी हैं। कृष्ण भक्ति में बचपन से लीन हैं। अब दुनियाभर में घूमकर इस्कॉन का प्रचार प्रसार करते हैं। इस्कॉन की भगवत गीता का महात्मय बताते हैं। भारत में अक्सर आते हैं। 100 से अधिक देशों में धार्मिक यात्राएं कर चुके हैं। देश ही नहीं विदेशों में सनातन धर्म, वैदिक परंपराओं का प्रचार प्रसार कर रहे हैं। भगवदगीता का वाचन करते हैं। भगवत कथा का वाचन भी करते हैं।
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Author: Vijay Singhal
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