मथुरा। राधाकुंड में होली में राधारानी की ननिहाल गांव मुखराई का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। यहां के चरकुला नृत्य की चर्चा भारत के साथ अब विदेशों में भी होने लगी है। विदेश में भी यहां के कलाकार चरकुला नृत्य की प्रस्तुति दे आए हैं। इसमें 108 जलते दीपकों को पहिए पर रख गांव मुखराई की गोपीकाएं नृत्य करती हैं। इस बार मुखराई में चरकुला नृत्य का आयोजन 15 मार्च को शाम 8 बजे से किया जाएगा। श्रीकृष्ण की बाल लीला स्थली राधाकुंड से गांव मुखराई 2 किलोमीटर दूर है। यह गांव राधारानी की ननिहाल है। यहीं से चरकुला नृत्य की शुरुआत हुई। वैसे तो चरकुला नृत्य की कथा श्रीराधारानी के जन्म से जुड़ी है। पर अब यह नृत्य होली महोत्सव का मुख्य हिस्सा बन चुका है। फाग मास की मस्ती में उड़ते रंग-गुलाल, फूलों की पंखुड़ियां के बीच नृत्य की चमक अलग ही आभा बिखेरती है। कथा के अनुसार जब मुखरा देवी ने सुना की उनकी पुत्री कीरत ने श्रीराधारानी को जन्म दिया है तो वह बड़ी प्रसन्न हुईं। खुशी में उन्होंने आंगन में रखे रथ के पहिए पर 108 दीप जलाकर उसे सिर पर रखकर नृत्य किया था। आगे चलकर यही नृत्य चरकुला के रूप में प्रसिद्ध हुआ। हुरियारे लोकगीत जुग-जुग जियो, तुम नाचन हारी गाकर महिलाओं को उत्साहित करते हैं। ब्रज लोक कला फाउंडेशन के निर्देशक दानी शर्मा ने बताया कि इस बार तोती देवी, उर्मिला देवी, प्रभा देवी और पिंकी देवी द्वारा मदनमोहनजी मंदिर से नृत्य के लिए चरकुला उठाया जाएगा।
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Author: Vijay Singhal
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