हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। प्रसिद्ध दाऊजी मंदिर बलदेव में अब रिसीवर तैनात नहीं होंगे। मंदिर की व्यवस्थाओं के संचालन के लिए 120 साल पुराने एग्रीमेंट के आधार पर कमेटी का चयन किया जाएगा। ये आदेश हाईकोर्ट इलाहाबाद ने मंदिर से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है। साथ ही आदेश का पालन कराने के लिए मामला जिला जज मथुरा को संदर्भित किया गया है। बीते 100 सालों से दाऊजी मंदिर बलदेव में रिसीवर व्यवस्था चली आ रही थी। न्यायालय एडीजे पंचम मथुरा में दायर एक वाद की सुनवाई के बाद 20 जुलाई 2024 और 12 सितंबर 2024 पारित किया था। इसमें वर्ष 2014 से तैनात रिसीवर रामकटोर पांडेय को न्यायालय में ऑडिट रिपोर्ट जमा न करने और बिना अनुमति के मंदिर में निर्माण कार्य कराए जाने के आरोप में रिसीवर पद से हटा दिया गया था। न्यायालय ने मंदिर के प्रशासनिक प्रबंधक कुमरपाल सिंह तोमर को रिसीवर बनाने का आदेश दिया था। इसी मामले में बलदेव निवासी गोविंदराम पांडेय और मनोज कुमार ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने न्यायालय एडीजे पंचम द्वारा पारित आदेशों पर रोक लगाने की मांग की थी। मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने 21 मार्च 2025 को अंतिम आदेश पारित कर दिया। इसमें दाऊजी मंदिर में रिसीवर व्यवस्था को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया है। साथ ही जिला जज को मामला संदर्भित करते हुए मंदिर की व्यवस्थाओं के संचालन के लिए 1904 के एग्रीमेंट के अनुसार सात सदस्यों की कमेटी बनाने के आदेश दिए हैं। कमेटी का गठन वरिष्ठतम एडीजे की निगरानी में एक माह के भीतर किया जाएगा। यही कमेटी मंदिर के कार्यों का संचालन करेगी। न्यायालय ने निचली अदालत का वह आदेश भी निरस्त कर दिया, जिसमें रामकटोर पांडेय को रिसीवर पद से हटाते हुए कुमरपाल सिंह तोमर को रिसीवर बनाया गया था। दाऊजी मंदिर की व्यवस्था संचालन के लिए वर्ष 1904 में एक एग्रीमेंट किया गया था। इसके अनुसार दाऊजी मंदिर से जुड़े 145 पंडा परिवारों से छह थोक चुने जाते थे। इन थोक में से सात सदस्य सर्वसम्मति से चुनकर आते थे, जो व्यवस्थाओं का संचालन करते थे। एक विवाद के बाद 1924 में ये व्यवस्था खत्म करते हुए रिसीवर की तैनाती का निर्णय लिया गया था। इसके बाद से रिसीवर व्यवस्था चली आ रही है।
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Author: Vijay Singhal
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