• Wed. Feb 18th, 2026

व्रन्दावन में बांके बिहारी मंदिर का बदला समय:1 अप्रैल से फूल बंगलों में विराजेंगे भगवान

ByVijay Singhal

Mar 10, 2023
Spread the love
हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा के वृंदावन में स्थित विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में दर्शनों के समय में परिवर्तन हो गया है। होली की दौज से लेकर दीपावली की दौज तक मंदिर में दर्शनों के समय में परिवर्तन किया गया है। ग्रीष्म काल में प्रतिवर्ष दर्शनों के समय में परिवर्तन किया जाता है।
बांके बिहारी मंदिर में शीत काल के दौरान दर्शन सुबह देरी से खुलते थे। बांके बिहारी मंदिर में दर्शन सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर खुलते थे। यहां सुबह श्रृंगार आरती 9 बजे होती थी और दोपहर को 1 बजे राजभोग आरती के साथ पट बंद हो जाते थे। शाम को मंदिर के पट 4 बजकर 30 मिनट पर खुलते थे जो कि 4 घंटे बाद रात 8 बजकर 30 मिनट पर शयन आरती के साथ बंद हो जाते थे। ग्रीष्म काल में यानी की होली की दौज से दीपावली की दौज तक मंदिर दर्शनों के लिए सुबह जल्दी खुलेगा। बांके बिहारी भक्तों को सुबह 7 बजकर 45 मिनट पर दर्शन देंगे। इसके बाद 8 बजे श्रृंगार आरती होगी। दोपहर राजभोग की आरती 12 बजे होगी और मंदिर के दोपहर के लिए पट बंद हो जाएंगे। शाम को मंदिर खुलने का समय शीत काल के मुकाबले 1 घंटे देरी से यानी 5 बजकर 30 मिनट पर रहेगा। अब भगवान बांके बिहारी जी की शयन आरती रात 9 बजकर 30 मिनट पर होगी और भगवान को शयन करा दिया जायेगा। बांके बिहारी मंदिर में गर्मियों में भव्य फूल बंगले बनाए जाते हैं। यहां सुबह शाम दोनों समय नए फूलों के मंदिर को सजाया जाता है और भगवान का फूलों से श्रृंगार किया जाता है। बांके बिहारी मंदिर में 108 दिन फूल बंगले बनाए जाते हैं। इस बार फूल बंगले 1 अप्रैल से बनेंगे जो कि 17 जुलाई तक बनाए जायेंगे। जन जन के आराध्य भगवान बांके बिहारी बाल स्वरूप में विराजमान हैं। यहां उनकी सेवा उसी लाड प्यार और भाव से की जाती है जिस तरह से बच्चे को रखा जाता है। मान्यता है कि भगवान बांके बिहारी 7 वर्ष के बालक के रूप में मंदिर में विराजमान हो कर भक्तों को दर्शन देते हैं। भगवान बांके बिहारी जी को करीब 500 वर्ष पूर्व स्वामी हरिदास जी ने अपनी संगीत साधना से प्रगट किया था। कहा जाता है कि स्वामी हरिदास भगवान कृष्ण के अनन्य भक्त थे। वह उनको रिझाने के लिए हर दिन कोई न कोई नया पद बनाते और उनको सुनाते थे। स्वामी हरिदास जी की संगीत साधना से प्रसन्न हो कर भगवान कृष्ण राधा रानी के साथ जमीन से प्रगट हुए। इस पर स्वामी हरिदास जी ने भगवान से आग्रह किया कि वह भगवान का तो श्रृंगार कर सकते हैं लेकिन राधा रानी महारानी हैं उनका सोलह श्रृंगार कैसे करेंगे। भक्त के भाव जानकर राधा कृष्ण एक स्वरूप में समा गए और बांके बिहारी के रूप में प्रगट हुए।
7455095736
Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published.