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छज्जू लाये खाट के पाये, मार-मार लट्ठन झूर कर आये

ByVijay Singhal

Nov 4, 2022
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। कार्तिक मास की दसवीं को एक बार फिर द्वापर कालीन कंस वध लीला जीवंत हो उठी। इस दौरान चतुर्वेदी समाज के लोगों का उत्साह देखते ही बना। परंपरागत वेशभूषा में चमकते लट्ठों के साथ बुजुर्ग और युवाओं की मौजूदगी उनके जोश को जगजाहिर कर रही थी। लीला स्थल कंस टीला पर कृष्ण-बलराम के ताल ठोकते ही चतुर्वेदी समाज के लोग कंस के पुतले पर लाठियों से झूरने (मारने) लगे। कंस टीला कृष्ण-बलराम की जय-जयकार से गूंज उठा। सैकड़ों लाठियाें के प्रहार से विशालकाय कंस का पुतला चंद क्षणों में धराशायी हो गया। बच्चे और किशोर उसके एक-एक अंग (लकड़ियां) को खींचकर ले गए। साथ में अपनी मस्ती में गाते जा रहे थे, छज्जू लाये- खाट के पाये-मार-मार लट्ठन-झूर कर आये। बृहस्पतिवार को कंस वध मेला का आयोजन श्रीमाथुर चतुर्वेद परिषद द्वारा किया गया। मान्यता है इसी दिन कृष्ण ने कंस का वध किया था। मेला में कृष्ण-बलराम हाथी पर सवार होकर निकले तो समाज के लोग जय-जयकार कर उठे थे। 18 हाथ ऊंचे कंस के पुतले को भगवान श्रीकृष्ण के इशारे पर झूरने के बाद चतुर्वेदी समाज के लोग विजय उत्सव के रूप में लौट। झांकियों में सबसे पहले कंस का पुतला जीप पर प्रदर्शित किया गया। तदोपरांत गणेश जी, कृष्ण-सुदामा, महारास, शिव-पार्वती और कृष्ण-बलराम की झांकी मेला का आकर्षण बनीं। होली गेट पर परिषद के मुख्य संरक्षक एवं अखिल भारतीय तीर्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पाठक का अभिनंदन किया। इस दौरान राजेंद्र प्रसाद चतुर्वेदी, गोपेेश्वरनाथ चतुर्वेदी, कांतानाथ चतुर्वेदी, राकेश तिवारी, गिरधारी लाल पाठक, नवीन नगर, कमल चतुर्वेदी, मनोज पाठक, संजीव चतुर्वेदी, गोपाल चतुर्वेदी, नीरज चतुर्वेदी, बल्लू चतुर्वेदी, हजारीलाल पाठक, अमित पाठक, राजेश चतुर्वेदी, अजीत चतुर्वेदी, अरविंद चतुर्वेदी, जेपी चतुर्वेदी शामिल हुए। महिलाओं ने की पुष्प वर्षा की। कंस वध के बाद विजयी मुद्रा में लौटे चतुर्वेदी समाज के लोगों का समाज की महिलाओं ने स्वागत किया। झांकियों पर पुष्प वर्षा की गई।

देश-विदेश से पहुंचे युवा चतुर्वेदी समाज द्वारा आयोजित मेला में देश ही नहीं दुनियां भर में रह रहे समाज के युवा आते हैं। इस बार भी दुबई और मुंबई से बड़ी संख्या में चतुर्वेदी परिवार यहां आए हुए हैं। चमकती लाठियां आकर्षण बनी।
मेला में लोगों की परंपरागत वेशभूषा और चमकती लाठियां लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनीं। मेला से पहले लाठियों को तेल से मजबूत करने लगते हैं। यही कारण है कि मेला के दौरान लाठियों पर चमक अलग ही नजर आती है।

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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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