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मथुरा में अब जल्द अस्तित्व में आएगी ब्रज भाषा अकादमी,

ByVijay Singhal

Feb 28, 2024
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मथुरा। सूरदास ब्रज भाषा अकादमी का अब जल्द ही गठन होने जा रहा है। प्रदेश सरकार ने इसकी रूप रेखा उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के साथ तैयार कर ली है। इसका कार्यालय गोवर्धन के पारासौली स्थित चंद्र सरोवर परिसर में स्थापित किया गया है। लखनऊ में सोमवार को अपर प्रमुख सचिव जितेंद्र कुमार की अध्यक्षता में सूरदास ब्रजभाषा अकादमी के गठन को लेकर बैठक हुई। इसमें उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ नगेंद्र प्रताप भी शामिल हुए। गौरतलब रहे कि 20 फरवरी को उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने अपर मुख्य सचिव भाषा जितेंद्र कुमार को प़त्र लिखकर अवगत कराया था कि पिछले साल उत्तर प्रदेश सरकार ने सूरदास ब्रजभाषा अकादमी स्थापित करने की अधिसूचना जारी की थी। उपरोक्त अधिसूचना के बाद अकादमी का कार्यालय मथुरा जनपद के गांव पारासौली स्थित चंद्र सरोवर परिसर में स्थापित किया गया है। यहां प्रसाद स्कीम के तहत अकादमी के कार्यालय भवन के साथ पुस्तकालय, कैंटीन, इंटरप्रजेशन सेंटर भी बनाया गया है। ऐसे में अब सूरदास ब्रजभाषा अकादमी के संचालन की आवश्यकता है जिसके लिए इसका गठन किया जाए। इसका तत्काल संज्ञान लेते हुए शासन स्तर पर सोमवार को लखनऊ में बैठक हुई। इसमें ब्रजभाषा अकादमी के विभिन्न पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया के तहत विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। इस बैठक में भाग लेकर लौटे उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ नगेंद्र प्रताप ने बताया कि आगामी 10 दिन में सूरदास ब्रजभाषा अकादमी का गठन कर दिया जाएगा। इसी के साथ विधिवत संचालन शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि अकादमी का कार्यालय भवन सूरदास की तप स्थली पारासौली में स्थापित किया गया है। यहां सूरदास पर फिल्म का प्रदर्शन भी होगा।
गोवर्धन की तलहटी में गोवर्धन ग्राम से लगभग एक सवा मील अग्निकोण में परासौली ग्राम है। यह महाकवि सूरदास का निवास स्थान है। इनका जन्म रूनकता ग्राम में हुआ था किंतु कहा जाता है कि ये प्राय: पारासौली ही में रहते थे और यहीं इन्होंने अपनी अधिकांश अमृतमयी रचनाएं की थी। सरोवर के पास ही छोंकर वृक्ष के नीचे श्रीवल्लभाचार्य जी की बैठक है । उसी के समीप सूरकुटी और सूर–समाधि श्रीवल्लभाचार्यजी की बैठक में ही स्थित है । सूरदास जन्मजात कवि थे, इनकी पदावलियों का संग्रह सूरसागर या सूरपदावली के नाम से प्रसिद्ध है ।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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