हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन के रंगनाथ मंदिर में 2 जनवरी को बैकुंठ एकादशी पर्व की तैयारी चल रही है। यहां साल में एक बार बैकुंठ द्वार खोला जाता है। बैकुंठ एकादशी के दिन खुलने वाले बैकुंठ द्वार से लाखों भक्त भगवान रंगनाथ (विष्णु और लक्ष्मी जी) की सवारी लेकर चलते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान रंगनाथ बैकुंठ धाम के लिए प्रस्थान करते हैं। रंगनाथ मंदिर में बैकुंठ द्वार पौष माह की बैकुंठ एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में खोला जाता है। पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन खुलने वाले इस द्वार से निकलने के लिए भक्त लालायित नजर आते हैं। भक्त भगवान रंगनाथ की सवारी के साथ इस द्वार से निकलते हैं। भगवान रंगनाथ के जयकारे लगाते हैं।मंडप तैयार किया जा रहा, बैकुंठ लोक की सफाई हो रही। बैकुंठ उत्सव के लिए मंदिर में तैयारी शुरू हो गई हैं। मंदिर में बैकुंठ द्वार के पास मंडप बनाया जा रहा है। जिसमें बैकुंठ एकादशी पर देशी विदेशी फूल लगाए जायेंगे। बैकुंठ लोक की साफ सफाई की जा रही है। मंदिर के कर्मचारी बैकुंठ लोक के हर हिस्से को अच्छे से धो रहे हैं। रंगनाथ मंदिर में साल में एक बार खुलने वाले बैकुंठ द्वार के पीछे मान्यता के बारे में मंदिर के पुजारी राजू स्वामी ने बताया कि ये उत्सव 21 दिन तक मनाया जाता है। बैकुंठ एकादशी से 10 दिन पहले और दस दिन बाद तक, इस उत्सव के 11 वें दिन बैकुंठ एकादशी पर्व पर बैकुंठ द्वार खोला जाता है। इस द्वार से निकलकर भगवान अपने धाम बैकुंठ धाम को प्रस्थान करते हैं। इसी कामना को लिए भगवान के भक्त भी बैकुंठ एकादशी पर भगवान की सवारी के पीछे निकलते हैं और बैकुंठ धाम की प्राप्ति की कामना करते हैं। मंदिर की CEO अनघा श्रीनिवासन ने बताया कि आलवर आचार्य बैकुंठ उत्सव के दौरान अपनी रचित गाथा भगवान को सुनाते हैं। भगवान राधा कृष्ण की भूमि वृंदावन में रंगनाथ मंदिर अनोखा मंदिर है। दक्षिण भारतीय शैली के इस विशालतम मंदिर में 584 खंभे हैं तो प्रत्येक खंभे पर 8 भगवान की प्रतिमा हैं। मंदिर के 7 दरवाजे हैं। 3 दरवाजे पश्चिम में तो 4 दरवाजे पूर्व में। कहा जाता है कि रंगनाथ मंदिर उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने के लिए सेतु के रूप में स्थापित है।
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Author: Vijay Singhal
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