ईदगाह इंतजामिया कमेटी के सचिव बोले आदेश को देंगे चुनौती
ईदगाह की अमीन रिपोर्ट पर न्यायालय के आदेश के बाद ईदगाह की पैराकारी कर रहे सचिव एडवोकेट तनवीर अहमद ने बताया कि वह इस आदेश को चुनौती देंगे। अदालत ने उनको बिना सुने आदेश दिया है। अन्य मामले दूसरी अदालतों में चल रहे हैं। उनमेें इस प्रकार का आदेश नहीं हुआ है। उनमें हमने 7/11 पर बहस की मांग की है। जिला जज की अदालत में भी अन्य मुकदमों हमें सुनवाई का अवसर दिया र्है। क्या है श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और ईदगाह के बीच का समझौता वादी पक्ष के अधिवक्ता शैलेष दुबे के अनुसार श्रीकृष्ण जन्मस्थान की पूरी जमीन 15.25 एकड़ थी। जिसका खसरा संख्या 825 है। वर्ष 1892 में रेलवे बोर्ड ने वृंदावन के लिए रेल लाइन निकाली। इस जमीन का मुआवजा जमीन के मालिक होने के कारण राजा पटनीमल के परिजन को दिया गया। इस जमीन के जाने के बाद इसकी नपत 13.37 एकड़ रह गई। वर्ष 1928 में ईदगाह द्वारा श्रीकृष्ण जन्मस्थान क्षेत्र में जो मलवा पड़ा उसे मस्जिद के मैंटीनेंस में प्रयोग किया जा रहा था। जिसका विरोध राजा पटनीमल के परिजन रायकिशन दास ने मथुरा मुंसिफ की अदालत में किया। १३ अगस्त 1929 का अदालत ने राय किशन दास के पक्ष में स्थाई स्थगनादेश जारी किया। इस क्षेत्र से मलवा हटाने पर रोक लगा दी। साथ ही हर्जाना देने का आदेश भी दिया। अधिवक्ता ने बताया कि इस आदेश के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने 1944 मेें हाईकोर्ट में अपील की जो कि हाईकोर्ट ने निरस्त कर दी। यह स्थगनादेश आज भी प्रभावी है।
1944 में महामना मदन मोहन मालवीय ने इसे खरीदा और वर्ष 1941 में श्री कृष्णजन्म भूमि ट्रस्ट तैयार किया। वर्ष 1948 में दिन व दिन देखरेख के लिए श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ तैयार किया। इस दौरान कई प्रकार के विवाद आपस में सामने आने लगे। जिनमें श्रीकृष्ण जन्मस्थान की जमीन पर मौजूद मुस्लिम बस्ती का विवाद भी मुख्य था। इन सभी मामलों को लेकर संघ के सचिव भगवान दास भार्गव ने 1964 मेें एक मुकदमा मुंसिफ मथुरा की अदालत में किया जो कि परिवर्तन के साथ 1967 में दर्ज हुआ। भगवान दास भार्गव के बाद इस मुकदमे की पैरवी संघ के उपमंत्री देवधर शास्त्री ने की और उनके द्वारा 1968 में एक समझौता किया गया। इस समझौते में मुस्लिमों की घोषी बस्ती तथा अन्य मामलों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। परंतु इस समझौते में मालिकाना हक को लेकर कोई बात नहीं थी। उन्होंने बताया कि हमारा कहना है कि संघ के पदाधिकारी को जमीन के संबंध में कोई भी समझौता करने का अधिकार ही नहीं था। इसलिए यह समझौता गलत था। इधर ईदगाह के सचिव एडवोकेट तनवीर अहमद ने बताया कि हम पहले से इस जमीन पर काबिज हैं और हमारे पास मालिकाना हक संबंधी पर्याप्त साक्ष्य हैं। जो समझौता १९६८ में हुआ है उसमें मुस्लिम बस्ती के अलावा श्रीकृष्ण जन्मस्थान की तरफ ईदगाह के नाले परनाले गिरने से रोकने को लेकर भी था। समझौते में मालिकाना हक को लेकर कोई बात नहीं थी।
अमीन सर्वे के साथ होना चाहिए आर्किलॉजीकल सर्वे भी : महेंद्र प्रताप
– अखिल भारत हिंदू महासभा ने किया निर्णय का स्वागत, कहा हमने भी की है अमीन सर्वे और नमाज रोकने की मांग
मथुरा। श्री कृष्ण जन्मस्थान ईदगाह प्रकरण मेें अदालत में केस लड़ श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि ईदगाह की अमीन रिपोर्ट के साथ-साथ ऑर्किलॉजीकल सर्वे भी होना चाहिए ताकि ईदगाह की सच्चाई आनी चाहिए। ईदगाह की दीवारों पर मंदिर के चिन्हं बने हुए हैं। हमने इस संबंध में भी अदालत में प्रार्थना पत्र दिया है। उन्हाेंने बताया कि वह दो जनवरी तक अदालत के खुलने पर अदालत से अपने केस में भी अमीन रिपोर्ट के आदेश करने की प्रार्थना करेंगे। वह सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत का हवाला देंगे।
अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दिनेश शर्मा ने निर्णय का स्वागत मिठाई बांटकर किया है। उन्होंने कहा कि यह पहली सीढ़ी है। उन्होंने भी इस संबंध में अदालत में अमीन सर्वे की मांग की है। उन्होने नमाज रोकने की मांग भी अदालत मेें से की है। हम इस फैसले से खुश हैं।
सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन बताया इस रिपोर्ट की आख्या से पता लगेगा कि किस के पास कितनी जमीन है और वस्तु स्थिति का छाया चित्र सुप्रीम कोर्ट तक अदालती कार्रवाई काम आएगा। वादकारी मनीष यादव ने बताया कि यह निर्णय स्वागत योग्य है। अधिवक्ता गोपाल खंडेेलवाल, मनीष यादव सहित कई वाद के अधिवक्ता दीपक देवकीनंदन शर्मा ने बताया कि इस आदेश से अदालती प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
दो जनवरी के बाद अमीन करेंगे विवादित ईदगाह का निरीक्षण
हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। ज्ञानवापी की तर्ज पर मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान के निकट बनी ईदगाह की अमीन रिपोर्ट की प्रक्रिया दो जनवरी को प्रारंभ होने जा रही है। एक जनवरी तक अदालत में अवकाश होने के कारण यह प्रक्रिया दो जनवरी से शुरू होगी। वादी के अधिवक्ता शैलेष दुबे ने बताया कि अदालत के आदेश पर अमीन रिपोर्ट की प्रक्रिया में विवादित स्थल का मानचित्र तैयार कर अपनी आख्या अदालत को सौंपी जाएगी। अमीन को अपनी आख्या आगामी 20 जनवरी से पहले ही अदालत को सौंपनी है। 20 जनवरी को सिविल जज सीनियर डिवीजन की न्यायाधीश सोनिका वर्मा केस पर सुनवाई करेंगी। दरअसल आलीगांव सरिता बिहार दक्षिणी दिल्ली निवासी हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता, उपाध्यक्ष सुरजीत सिंह यादव निवासी बेहरमपुर फाजिलपुर गुरुग्राम हरियाणा ने भगवान बाल श्रीकृष्ण विराजमान ठाकुर केशवदेव का भक्त बनकर वाद ८ दिसंबर को सिविल जज सीनियर डिवीजन तृतीय की अदालत में दाखिल किया। अदालत मेें यह केस वाद संख्या 839 पर दर्ज किया। अधिवक्ता द्वारा अदालत में वर्ष 1967 में हुए श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और इंतजामिया कमेटी ईदगाह के मध्य हुए समझौते की प्रति भी दाखिल की गई। वादी के अधिवक्ता शैलेष दुबे द्वारा अदालत से विवादित स्थल ईदगाह की अमीन रिपोर्ट मंगाए जाने की प्रार्थना की थी। जिस पर अदालत ने अमीन को केस के विवादित स्थल से अमीन की आख्या रिपोर्ट मय मानचित्र के प्रस्तुत करने के आदेश किए हैं। वादी विष्णु गुप्ता ने बताया कि इस फैसले से बहुत खुश हैं।
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