हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। शहर के बीएसए कॉलेज के बीए एलएलबी तृतीय वर्ष के छात्र का शव शुक्रवार सुबह कमरे से 200 मीटर दूर हनुमान बगीची में तख्त पर मिला। पास में ही बाइक खड़ी थी। रूम पार्टनर की सूचना पर कोतवाली पुलिस ने जानकारी जुटाते हुए शव को कब्जे में लिया। परिजन भी फरीदाबाद से मथुरा आ गए। पोस्टमार्टम के बाद विसरा सुरक्षित किया गया। फरीदाबाद के गांव कौरोली निवासी सुमित सोलंकी (22) पुत्र दिनेश सोलंकी बीएसए कॉलेज में बीए एलएलबी तृतीय वर्ष का छात्र था। वेस्ट प्रताप नगर में किराए पर कमरा लेकर रह रहा छात्र सुबह नहीं दिखा तो उसके रूम पार्टनर चिराग ने उसकी तलाश की तो करीब 200 मीटर दूर हनुमान बगीची में तख्त पर उसे लेटा देखा। उसे उठाने की कोशिश की तो नहीं उठा। इस पर चिराग ने पुलिस और परिजन को सूचित किया। कोतवाल संजय कुमार पांडेय पुलिस टीम के साथ पहुंचे और शव को कब्जे में लिया। कोतवाल ने आसपास के लोगों के अलावा रूम पार्टनर से भी जानकारी जुटाई। कोतवाल ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्र की मौत का कारण साफ नहीं हो सका। विसरा सुरक्षित किया गया है। इस मामले में कोई भी तहरीर नहीं दी गई है। तहरीर मिलने पर मुकदमा दर्जकर जांच के बाद ही कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।तीन बहन और भाइयों में दूसरे नंबर का था सुमित मृतक छात्र तीन बहन और भाइयों में दूसरे नंबर का था। उससे बड़ा भाई अंकित सोलंकी है तो उससे छोटी बहन कोमल है। बड़ा भाई अविवाहित है तो बहन की शादी हो चुकी है। मृतक युवक के पिता दिनेश सोलंकी का तीन साल पहले निधन हो चुका है। पिता पेशे से प्रॉपर्टी डीलर थे। मां रेखा ही दोनों बच्चों को देखभाल कर रही हैं। पिता के भाई और परिवार संयुक्त रूप से ही रहते हैं। सुमित सोलंकी 10 अप्रैल को ही घर से लौटकर आया था। उससे पहले एक सप्ताह घर में ही रुका था। तहेरे भाई अभिषेक सोलंकी ने बताया कि सुमित को मैं बहुत प्यार करता था। छोटी से लेकर बड़ी बात तक सुमित उसे बताता था। उसके शरीर पर भी कोई चोट के निशान नहीं थे। फिलहाल उसकी मौत कैसे हुई, यह साफ नहीं हो सका है। साफ होने पर कार्रवाई करेंगे। उसके मौत की जानकारी सुमित के रूम पार्टनर चिराग ने दी।
बीएसए कॉलेज में आधे दिन का शोकावकाश आज बीएसए कॉलेज के प्राचार्य ललित मोहन शर्मा ने बताया कि छात्र की संदिग्ध मौत से आधे दिन का शोकावकाश शनिवार को कॉलेज में रहेगा। 14 अप्रैल को अवकाश के चलते ऐसा नहीं हो सका।
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Author: Vijay Singhal
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