हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। भाजपा के लिए नगर निकाय का चुनाव जहां प्रतिष्ठा का विषय बना है, महापौर और पार्षद के उम्मीदवार का चयन उतनी ही टेड़ी खीर बना है। पार्टी यह तक तय नहीं कर पाई है कि सामान्य सीट पर ब्राह्मण या वैश्य वर्ग के किस प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा जाए। वहीं प्रमुख नेताओं की पत्नी और अन्य जातियों के प्रभुत्व वाले नेता भी इस दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहते हैं। नतीजा देररात तक चले मंथन के बावजूद पार्टी नियमानुसार बनने वाले तीन नामों के पैनल को तैयार नहीं कर पाई। विचारोपरांत 15 नामों का पैनल लखनऊ हाईकमान को भेजा गया है। जिले के प्रभारी मंत्री और प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह और भाजपा संगठन की दृष्टि से सह चुनाव प्रभारी और एमएलसी रजनीतकांत माहेश्वरी ने कोर कमेटी के सदस्यों के साथ देर रात तक बैठक की। इसमें महापौर पद के लिए नामों पर विचार-विमर्श किया गया। करीब तीन दर्जन आए आवेदनों में से पार्टी नेताओं ने 15 नामों को विचार के योग्य माना। इसमें 12 प्रत्याशी वैश्य वर्ग से हैं तो 3 प्रत्याशी ब्राह्मण समाज से है। सबसे ज्यादा कश्मकश वैश्य वर्ग के प्रत्याशी को लेकर है। यहां पार्टी के निष्ठावान और कर्मठ कार्यकर्ताओं के साथ ही धन और बाहुबल के सहारे मेयर बनने का ख्वाब संजोने वाले जोर आजमाइश में लगे हैं। इससे मुकाबला कड़ा है। वहीं ब्राह्मण समाज से भी टिकट के दावेदारों की संख्या कम नहीं है। हालांकि ब्राह्मण समाज से विधायक होने के चलते उनकी दावेदारी के मुकाबले वैश्य समाज का पलड़ा भारी है। महानगर संगठन कोर कमेटी की देररात तक चली बैठक में पार्टी यह तो तय कर ही नहीं पाई कि टिकट वैश्य वर्ग को दिया जाए या ब्राह्मण, वहीं पार्टी नेता तीन नामों का पैनल तक तैयार नहीं कर सके। कद्दावर नेताओं में कोई भी अपनी दावेदारी वापस लेने के तैयार नहीं था, वहीं सिफारिश और जीत के दावे इतने कि कोर कमेटी के नेताओं ने पैनल तैयार करने से ही पल्ला झाड़ लिया। सूत्र बताते हैं कि तीन नामों के पैनल पर आम सहमति न बनने पर कुल 15 नामों का पैनल तैयार कर हाईकमान को भेजा गया है।
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Author: Vijay Singhal
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