हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिघल
मथुरा। कोरोना महामारी के समय में जेल में बंदियों की संख्या को कम करने के लिए अदालत से पैरोल पर छोड़े गए कुल बंदियों में से 9 बंदी अभी भी न तो जेल आए हैं और न इन बंदियों ने अदालत में आत्मसमर्पण किया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिला कारागार प्रशासन ने इन बंदियों को अदालत में आत्मसमर्पण करने और कारागार में लाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है। 15 दिन के अंदर इन बंदियों को आत्मसमर्पण करना होगा। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान जेलों में भी इसे रोकने के लिए सरकार ने दोष सिद्ध कैदी तथा विचाराधीन बंदियों को पैरोल पर छोड़ा था। जिला कारागार से दो-तीन दफा में लगभग 200 कैदी और बंदियों को छोड़ा गया। पहली दफा में ऐसे 32 बंदियों को पैरोल पर छोड़ा गया जिनकी सजा सात साल से अधिक नहीं थी। कोरोना महामारी के बाद इन बंदियों को अदालत के माध्यम से वापस जेल में आना था लेकिन 9 बंदी ऐसे हैं जोकि वापस जेल नहीं आए। यह बंदी थाना मगोर्रा, हाईवे, वृंदावन, कोतवाली, सदर बाजार, जीआरपी मथुरा और थाना जमुनापार के हैं। 24 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे सभी दोष सिद्ध और विचाराधीन बंदियों को 15 दिन में न्यायालय में आत्मसमर्पण करने को कहा है। वह संबंधित न्यायालयों से अपनी सजा को खत्म करने या कम करने का अनुरोध कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद जिला कारागार ने इन कैदियों की सूची बनाकर एसएसपी को सौंप दी है। जेल अधीक्षक ब्रजेश कुमार ने बताया कि कारागार से कोरोना काल में पैरोल पर छोड़े गए बंदियों में से कुल 9 बंदी अभी तक वापस नहीं आए हैं। हमने उनकी सूची बनाकर एसएसपी को भेज दी है।
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Author: Vijay Singhal
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