हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। मांट और नौहझील में चेक डैम निर्माण में अनियमितता सामने आने के बाद डीएम पुलकित खरे ने लघु सिंचाई विभाग की ओर से मनरेगा विभाग से मांगी गई वित्तीय अनुमति संबंधी फाइल पर आपत्ति लगाकर वापस कर दिया है। डीएम ने लघु सिंचाई विभाग से चेक डेैम बनाने से पहले के फोटो भी मांगे हैं। मीडिया ने 12 मार्च के अंक ‘चेक डैम निर्माण में गड़बड़झाला’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर पूरा मामला उजागर किया था। खबर प्रकाशन के बाद डीएम ने इस पर संज्ञान लिया और लघु सिंचाई विभाग की ओर से मनरेगा विभाग को भेजी वित्तीय अनुमति संबंधी फाइल को लौटा दिया। लघु सिंचाई विभाग ने मांट और नौहझील ४०-४० लाख में तैयार होने वाले दो चेक डैम मनरेगा विभाग की बिना वित्तीय अनुमति के ही तैयार करा लिए हैं। इनमें कुछ काम होना शेष है। मनरेगा के तहत आवंटित ९-९ लाख रुपये चेक डैम निर्माण में लगने थे और कार्य भी मनरेगा श्रमिकों से करवाना था।
शासन के निर्देशों के अनुरूप स्थानीय लोगों को मजदूरी देने के उद्देश्य से चेक डैम का निर्माण कराया जाना है। परंतु लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता विकास कुमार ने मनरेगा विभाग से वित्तीय अनुमति लिए बगैर ही दोनों चेक डैम का निर्माण कार्य लगभग पूरा करा दिया। इसके बाद महज औपचारिकता के लिए मनरेगा से जो धनराशि मिलनी थी, उसके लिए फाइल मनरेगा उपायुक्त दुष्यंत कुमार सिंह को भेजी। डीएम ने इस फाइल पर कई आपत्तियां लगाईं हैं। मनरेगा श्रमिकों को काम नहीं मिला। लघु सिंचाई विभाग द्वारा मनरेगा विभाग की अनुमति के बगैर चेक डैम के निर्माण कराने से उन मजदूरों को रोजगार नहीं मिल सका, जिनको रोजगार दिया जाना था। इस प्रकार के निर्माण कार्योा में मनरेगा को शामिल करने की पीछे शासन की मंशा है कि कार्यस्थल से पांच किलोमीटर के दायरे मेें आने वाले मजदूरों को रोजगार मिल सके।
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