हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा के वृंदावन में स्थित दक्षिण भारतीय शैली के श्री रंगनाथ मंदिर में चल रहे दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव के तीसरे दिन देर शाम भगवान की सवारी श्री हनुमान जी पर विराजमान हो कर निकली। भगवान की सवारी बड़े बगीचा पहुंचने पर भव्य आतिशबाजी की गई। इस छोटी आतिशबाजी कहा जाता है। ब्रह्मोत्सव के तीसरे दिन वृंदावन में स्थित रंगनाथ मंदिर में देर शाम हनुमान जी की सवारी निकाली गई। रथ मंडप से भगवान रंगनाथ श्री हनुमान जी पर विराजमान होकर निकले। सवारी के पुष्करिणी द्वार पर पहुंचने पर मंदिर के पुजारियों ने आरती की। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर भगवान रंगनाथ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। ब्रह्मोत्सव में हनुमान जी की इस सवारी के पीछे मान्यता है कि भगवान के दासों में दास हनुमान जी प्रमुख हैं। उन्होंने अपना परिचय दिया है कि वह भगवान राम के दास हैं। दास अपने प्रभु की सेवा में सदैव प्रस्तुत रहते हैं। हनुमान जी ने अपने कंधों पर बैठाकर श्री राम लक्ष्मण की मित्रता सुग्रीव से कराई थी। श्री राम जी की शक्ति से सुग्रीव ने बाली का वध किया था। सोने से निर्मित हनुमान जी पर विराजमान प्रभु के दर्शनों से संकट दूर होता है और हमेशा विजय वैभव की प्राप्ति होती है। हनुमान जी पर विराजमान भगवान रंगनाथ की सवारी मंदिर प्रांगण से निकल कर गाजे बाजे के साथ नगर भ्रमण करते हुए बड़े बगीचा पहुंची। जहां मंडप में कुछ देर विश्राम करने के बाद पुनः बगीचा के मुख्य द्वार पर आई। भगवान की सवारी के बड़े बगीचा द्वार पर पहुंचते ही भव्य आतिशबाजी शुरू हो गई। छोटी आतिशबाजी के नाम से मशहूर इस आतिशबाजी में एक के बाद एक कई तरह के पटाखे चलाए गए। आतिशबाज भगवान के समक्ष कभी रोशनी बाली,कभी रॉकेट और कभी आसमान में जाकर रंग बिरंगी रोशनी करने वाले पटाखे चला रहे थे। करीब आधा घंटे तक हुई आतिशबाजी को देख श्रद्धालु आनंदित हो उठे और भगवान रंगनाथ के जयकारे लगाने लगे।
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Author: Vijay Singhal
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