ब्रज की परंपरागत होली का होगा गायन
श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा और सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि इस वर्ष होली में प्राचीन परम्पराओं और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करते हुए वर्तमान परिप्रेक्ष्य के अनुरूप व्यवस्था की गई थी होली का गायन,नृत्य मर्यादित एवं ब्रज की परंपरा के अनुरूप हुआ। फूल होली, रंग और अबीर गुलाल की विशेष व्यवस्था की गई थी।
ढोल नगाड़ों के साथ खेली लट्ठमार होली
श्री कृष्ण जन्मभूमि पर ढोल नगाड़ों के बीच लट्ठमार होली खेली गयी। होली को आकर्षित करने के लिए नासिक से ढोल,नगाड़े और घंटे ,घड़ियाल बजाने वाले कलाकार होली के दौरान मशीनों से टेसू के रंग की बरसात और हर्बल गुलाल उड़ाया गया। लट्ठमार होली खेलने के लिए रावल गांव से हुरियारे और हुरियारिन आयी।
द्वारिकाधीश मंदिर में ढोल की थाप के बीच उड़ेगा अबीर गुलाल
पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के प्रसिद्ध द्वारिकाधीश मंदिर में रंगभरनी एकादशी को जमकर अबीर,गुलाल और रंग उडा। द्वारिकाधीश भगवान कुंज में विराजमान हो कर भक्तों के साथ होली खेली। इस दौरान मंदिर प्रांगण में ढोल की थाप पर होली के प्रसिद्ध परंपरागत रसिया का गायन किया गया।
