हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा 26 फरवरी 2023 रोम जल रहा था। नीरो बंसी बजा रहा था। यह कहावत मथुरा शहर पुलिस पर बिल्कुल सटीक बैठती है। नीरो तो रोम में बंसी बजा रहा था मगर यहां तो बंसीवारे की नगरी में ही उनके भक्तों की जमकर बंसी बज रही है मगर पुलिस है कि सांप को सांप तो क्या रस्सी भी मानने को तैयार नहीं है। जो ऐसी घटनाओं को करने कराने वालों के आगे-पीछे सुरक्षाकर्मी के रूप में रहती हो, उस पुलिस से भला उम्मीद भी और क्या की जा सकती है? सब सेट हैं और मिलकर बंसी बजवाई जा रही है। इसलिए आपको ऐसी खबर है अन्य समाचार माध्यमों में भी नजर नहीं आती होंगी।
मथुरा शहर में पिछले कुछ माह से चोरी उठाई गिरी, चैन स्नैचिंग, ठगी, मंदिरों में लूटमार, सेक्स रैकेट और क्रिकेट के सट्टे जैसे गोरखधंधे बड़े पैमाने पर हो रहे हैं। लेकिन नगरीय पुलिस अधिकारी चैन की बंसी बजा रहे हैं। इस शहर में ऐसे बहुत हैं जो बने बंसी उपलब्ध कराते हैं, जिन्हें वे चैन से बजाते हैं। जब आप उनकी लाई गई बंसी बजाओगे तो फिर आपको राग भी उनका ही सुनना, सुनाना पड़ेगा। नहीं तो वह आपकी बंसी बजवा देंगे। मथुरा में सर्वाधिक वारदातें थाना कोतवाली की बंगाली घाट चौकी के क्षेत्र वाले यात्री बाहुल्य इलाके में हो रही हैं, जिनमें से काफी घटनाओं का तो पता ही नहीं चल पाता। काफी घटनाएं यात्रियों के अब अपने घर पहुंचने के बाद उन्हें पता चलती है जबकि काफी घटनाओं की जानकारी हो जाने के बावजूद लोग उनकी रिपोर्ट नहीं दर्ज कराते हैं और जो रिपोर्ट दर्ज कराते हैं वह मुसीबत में और फस जाते हैं उन्हें गिरोह खुलकर और घेरने लगते हैं, जिससे पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान खड़ा हो जाता है बल्कि यह कहा जाए कि पुलिस अगर मौके पर आती भी है तो वह अपराधियों की सरपरस्ती के लिए आती है तो यह ज्यादा सही होगा। पीड़ित की सहायता से उसका कोई वास्ता नहीं होता जबकि जहां तक हमारा मानना है और हमारा यह भी मानना है कि हमारा जो मानना है, वह गलत नहीं है। यह सच्चाई है कि 1-1 खुराफाती पुलिस की नॉलेज में है। सिर्फ पुलिस ही नहीं, यदि श्रीकांत शर्मा जी की मानें तो यह मामले सीएम योगी आदित्यनाथ की भी नॉलेज में हैं। लेकिन इसके बावजूद इन्हें खोलने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा है। इसलिए घटनाओं पर घटनाएं होती चली जा रही है मगर वह दर्ज नहीं हो रही हैं। लेकिन इन घटनाओं की पूरे शहर में चर्चा जरूर हो रही है और गली-गली हल्ला मच रहा है, ऑडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि बहुत खराब समय आ गया है बहन, बच कर रहना। ताजा कुछ मामलों में से एक मामला विगत दिवस शुक्रवार दिनदहाड़े का है। विश्राम घाट के समीपवर्ती सती बुर्ज के निकट रहने वाली 62 वर्षीय गंगा देवी पत्नी स्वर्गीय मनमोहन चतुर्वेदी दोपहर के समय कुछ सामान लेने के लिए घर से बाजार निकली थीं। कंस खार सब्जी मंडी के पास उन्हें दो लड़की मिले, जिन्होंने उन से वृन्दावन का रास्ता पूछा। उन्होंने उन्हें रास्ता बताया तो वह कहने लगे हमें आप ही ले चलो महिला ने कहा हम क्यों ले चलें इस पर उन्होंने न जाने क्या सम्मोहन किया कि वह उनके पीछे पीछे चल दीं। कंस खार से विश्राम घाट, द्वारकाधीश, स्वामी घाट, डोरी बाजार, चौक बाजार, गुड़ हाई बाजार होते हुए वह लड़के महिला को कच्ची सड़क की एक गली में ले गए, जहां पर उन्होंने कहा कि आप अपने यह आभूषण उतार दो। इस पर उन्होंने अपनी एक-एक तोले की दो चूड़ियां और दो तोले की जंजीर उतारकर उन्हें दे दी, जिसके एवज में उन्होंने उन्हें मुक्त कर दिया और एक छोटा बैग दिया, जिसमें कूड़ा-करकट भरा निकला। इस प्रकार करीब ढाई लाख रुपए का सोना लेकर वह दोनों चंपत होगए। एक ऐसी ही घटना को कारित करने का प्रयास लाला गंज की रहने वाली एक महिला के साथ भी हुआ बताते हैं, जिसमें उसके पास कुछ युवक पहुंचे जिन्होंने हमसे यह कहा कि उन्होंने यह सोना क्यों पहन रखा है? जब महिला ने उनसे अकड़ कर बात की, तब वे वहां से नौ दो ग्यारह हो गए। इस संदर्भ में महिला ने सोशल मीडिया पर ऑडियो भी डाली बताते हैं जिसमें सभी को ऐसी घटनाओं से सचेत रहने के लिए कहा गया है। एक अन्य महिला के साथ भी इसी प्रकार की घटना हुई बताई गई है। लेकिन उसका नाम पता अभी पता नहीं चल पाया है। सबसे बड़ी बात यह है कि नगर पुलिस इन घटनाओं को लेकर कतई गंभीर नहीं है। उसे ऐसी घटनाओं की कोई परवाह भी नहीं है। ऐसे में उसकी भूमिका संदिग्ध नजर आती है। लेकिन आप कर क्या लोगे, जब इतने महीनों से इतना हल्ला मच रहा है, कप्तान तक बदल गए। नए कप्तान भी आ गए। लेकिन शहर की स्थिति फिर भी जस की तस बनी हुई है बल्कि यदि यह कहें कि और बद से बदतर होती जा रही है तो ज्यादा सही होगा। उल्लेखनीय है कि ऐसे मामलों को लेकर पूर्व ऊर्जा मंत्री और मथुरा वृन्दावन विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान भाजपा विधायक श्रीकांत शर्मा सीओ सिटी से यह तक कह चुके हैं कि वह इस गिरोह का ऑपरेशन करें अन्यथा उन्हें ऑपरेशन कराना आता है। लेकिन इसके बावजूद आज तक ऑपरेशन नहीं हुआ है और घटनाओं पर घटनाएं होती चली जा रही है, जिनका इंद्राज भी कहीं नहीं हो रहा है ऐसे में आम जनमानस में मोदी-योगी की क्या छवि बन रही होगी, इसका अनुमान आप खुद लगा लीजिए। चर्चा है कि ऐसे कार्यों के ठेके उठते हैं। अगर ठेके उठते हैं तो ठेकेदार कौन है? ठेका देने वाला कौन है? कोई नहीं बताता। लेकिन कहने वाले कहते हैं पक्ष-विपक्ष सब मिले हुए हैं। इसीलिए तो कोई कुछ नहीं बोलता है जितने भी मठाधीश हैं उनके पास उनका हिस्सा पहुंचता है। एक हमाम में तब्दील हुई है दुनिया, सभी नंगे हैं, किसे देख के शरमाऊं मैं? देखना यह होगा के सदन में माफिया राज को खत्म करने की बात करने वाले सीएम योगी के राज में ऐसे भूखे-नंगे लोग जो संसार के मालिक से भी नहीं डरते, उसके सामने ही उसके भक्तों को लुटवाते हैं, जेल की रोटी कब पाते हैं और आला अधिकारी ऑपरेशन लेकर मौके पर कब आते हैं। कहने वाले तो यह भी कहते हैं कि कप्तान तो अब अच्छे आए हैं मगर अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता। ऐसा नहीं है यदि चना लोहे का हो तो वह भाड़ भी फोड़ सकता है और भड़ मूझे का मुंह भी तोड़ सकता है। हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। वह तेरे दिल में हो या कि मेरे दिल में, हो कहीं भी मगर आग जलनी चाहिए, सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि यह सूरत बदलनी चाहिए।
