हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा के बरसाना में ब्रह्माचल पर्वत के मानगढ़ शिखर पर स्थित प्राचीन मान मंदिर को नए भव्य रूप देने की तैयारी है। ब्रज में गौ सेवी सन्त पद्म श्री रमेश बाबा ने भूमि पूजन करके मन्दिर निर्माण कार्य की आधार शिला रखी। ये मंदिर 100 करोड़ की लागत से करीब 40 महीने में बनकर तैयार होगा। इसको बनाने में लाल और सफेद पत्थर का इस्तेमाल होगा। इस अवसर पर पद्मश्री रमेश बाबा महाराज ने कहा कि मानगढ़ पर स्थित मान मंदिर लंबे समय से सूक्ष्म रूप में ही है, लेकिन अब श्री मान बिहारी लाल जी की इच्छा ब्रज के अनूठे मन्दिर में विराजमान होने की है। इसी लिए अब मान मन्दिर सेवा ट्रस्ट ने इसे ब्रज के ऐसे इकलौते मन्दिर का रूप देने का संकल्प लिया है जो ब्रज ही नहीं विश्व में अद्भुत होगा। शिलान्यास से पहले मान मंदिर कला अकादमी की बालिकाओं ने मान लीला की जीवंत प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रद्धालुओं का मन जीत लिया। इसके बाद रमेश बाबा महाराज और गौ सेवी सन्त गोपेश बाबा ने मान मंदिर सेवा संस्थान द्वारा प्रकाशित मन्दिर निर्माण से भगवत प्राप्ति व विनयांजलि नामक पुस्तकों का विमोचन किया। देश विदेश में सैकड़ों मंदिरों को बनाने वाले एवं अयोध्या के राम मन्दिर निर्माण में भी अपना योगदान दे रहे तकनीकी विशेषज्ञ सुप्रसिद्ध मन्दिर आर्किटेक्ट मितुल सोमपुरा और मनीष बग्गा ने बताया कि बरसाना के ब्रह्माचल पर्वत के मानगढ़ शिखर पर 108 फुट ऊंचा मन्दिर ,भूमिजा शैली में तैयार किया जा रहा है। मितुल सोमपुरा के मुताबिक भूमिजा शैली में मकराने से बनने वाला ये पहला मन्दिर होगा। भूमिजा शैली 11वी शताब्दी से पूर्व की कलात्मक शैली है। इसमे लोहा, सरिया, चूना सीमेंट आदि का प्रयोग नही होता। पत्थर की शिलाओं को ही एक दूसरे से जोड़ कर भवन तैयार किया जाता है। मनीष बग्गा ने बताया कि ये मन्दिर 40 महीने में बनकर तैयार हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके निर्माण में करीब सौ करोड़ रुपये की लागत आएगी। मकराना और बंशी पहाड़पुर का लाल पत्थर इस्तेमाल होगा। मितुल सोमपुरा के मुताबिक भूमिजा शैली में मार्बल से बनने वाला ये दुनियां का पहला मन्दिर होगा। शिलान्यास समारोह में सन्त गोपेश बाबा के अलावा नन्दगांव के नंद बाबा मन्दिर के सेवायत रमेश चन्द्र गोस्वामी प्रधानाचार्य, विनयांजलि पुस्तक के रचयिता प्रसिद्ध कवि राम शरण शर्मा “शरण” ,मान मंदिर सेवा संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री, सन्त नृसिंह दास महाराज, माताजी गौशाला के सचिव सुनील सिंह, आचार्य सुरेश शास्त्री , महेश चंद शास्त्री, माधवी शरण, साध्वी मुरलिका शर्मा, श्री जी शर्मा , संजीव जिंदल के अलावा प्रसिद्ध मंदिर आर्किटेक्ट मितुल सोमपुरा अपनी पूरी टीम के साथ उपस्थित रहे।
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Author: Vijay Singhal
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