हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिघल
मथुरा। लखनऊ में कुछ विधायकों द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष ब्रज 84 कोस परिक्रमा के वर्तमान स्वरूप को कृत्रिम अंतर परिक्रमा बताए जाने का ब्रज के संत, महंत और पुरोहित समाज ने विरोध किया है। विभिन्न धार्मिक संगठनों से जुडे़ लोगों ने कहा है कि यह प्रयास ब्रज ८४ कोस परिक्रमा के विकास को अवरुद्ध करने की कोशिश है। इस स्थिति से छह फरवरी को मुख्यमंत्री को भी अवगत कराने का फैसला किया।
बृहस्पतिवार को श्रीजी बाबा आश्रम में चतु संप्रदाय के महंत फूलडोल बिहारीदास की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के दौरान हिंदूवादी नेता गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इस प्रोजेक्ट पर डीपीआर बना चुका है, ऐसे में कुछ लोग इसमें अड़ंगा लगाने की कोशिश कर रहे हैं। तीर्थ पुरोहित नवीन नागर ने कहा की सैकड़ों वर्षों की परंपरा को फर्जी कहना अत्यंत खेदपूर्ण है। पुष्टिमार्ग के गोस्वामी व अनुयायियों द्वारा महाप्रभु वल्लभाचार्य के बाद इस परंपरा के अंतर्गत मार्ग व लीला स्थलियों पर सवाल उठाया गया है। रमाकांत गोस्वामी ने कहा कि वाह्य परिक्रमा में कोई भी तीर्थ स्थल नहीं जबकि परंपरागत यात्रा मार्ग में 12 वन 24 उपवन व लीला स्थलियों के दर्शन हैं। उन्होंने कहा कि वाह्य परिक्रमा केवल अधिक मास या कार्तिक मास में लगती है जबकि अंतर परिक्रमा निरंतर चलती है। वर्ष में लाखों लोगों के साथ विभिन्न संप्रदायों के आचार्यों द्वारा लगाई जाती है। बैठक का संचालन पंडित अमित भारद्वाज ने किया।
इस दौरान मान मंदिर मंदिर बरसाना के सुनील सिंह, भागवत वक्ता आचार्य लालजी भाई, राम शास्त्री, राघव शास्त्री, मधुवन बिहारी के महंत, युवा ब्राह्मण महासभा के राजेश पाठक, अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रयाग नाथ चतुर्वेदी, वरिष्ठ नागरिक समिति के एसएस जौहरी, कालिंदी सेवा संस्थान के गोपालाचार्य, महंत भगवान दास, दिनेश पंडा, सत्यवीर, सर्वोदयी ब्राह्मण संस्थान के नारायण शर्मा, तीर्थ पुरोहित यज्ञदत्त चतुर्वेदी, ब्राह्मण नेता श्याम शर्मा, नंद लाला मंदिर नंदगांव के सेवायत सुशील गोस्वामी मौजूद रहे।
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Author: Vijay Singhal
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