हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। जनपद में स्कूल संचालकों की मनमानी इस कदर हावी है कि अभिभावकों को एक ही निर्धारित दुकान से किताबें खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है। इन दुकानों से निजी प्रकाशनों की महंगी किताबें लेने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे अभिभावकों की जेब पर भारी बोझ पड़ रहा है। इस पूरे मामले में विभागीय अधिकारी मौन बने हुए हैं। स्कूल संचालकों की मानमानी की पड़ताल में जमीनी हकीकत परखी तो चौंकाने वाला मामला सामने आया। बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर ही निजी प्रकाशनों की महंगी किताबों का खेल चल रहा है। शहर की एक प्रमुख किताब की दुकान पर जनपद के नामी कॉन्वेंट स्कूलों की किताबों के सेट बेचे जा रहे हैं। यहां कक्षा 2 का सेट करीब 6 हजार रुपये और कक्षा 3 का सेट लगभग 7 हजार रुपये में उपलब्ध है। इनमें शामिल सभी किताबें निजी प्रकाशनों की हैं। कक्षा 2 के सेट में 16 और कक्षा 3 के सेट में 17 किताबें शामिल हैं। किताबों का यह सेट जहां अभिभावकों की जेब पर बोझ डाल रहा है, वहीं बच्चों के कंधों का भार भी बढ़ाएगा।
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन और दुकानदारों के बीच कमीशन का खेल चलता है। यही वजह है कि उन्हें एक ही दुकान से किताबें, कॉपियां और स्टेशनरी खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है जबकि बाजार में सस्ते विकल्प मौजूद हैं। अभिभावकों का आरोप है कि एक ओर अधिकारी एनसीईआरटी की किताबें लागू कराने के दावे करते हैं वहीं उनके कार्यालय के आसपास ही नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आज तक किसी अधिकारी ने न तो दुकानों की जांच की और न ही स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की है। इससे स्कूल संचालक और दुकानदारों के हौसले बुलंद हैं। बीएसए रतन कीर्ति ने कहा कि जल्द ही अभियान चलाकर ऐसे दुकानदारों और स्कूलों को चिह्नित किया जाएगा जो नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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Author: Vijay Singhal
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