हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। हिमालय से आ रही सर्द हवाओं ने यूपी में ठिठुरन बढ़ा दी। कई जिलों में घना कोहरा छाया रहा। उन्नाव में लखनऊ-कानपुर हाईवे पर कोहरे के कारण एक-एक करके 5 गाड़ियां टकरा गईं। जिसमें 12 लोग घायल हुए। आगरा, मथुरा, मेरठ समेत कई जिलों में बूंदा-बांदी हुई। बीते 24 घंटे में प्रदेश में आगरा सबसे ठंडा रहा। यहां का न्यूनतम तापमान 5.2°C दर्ज किया गया। वहीं, बस्ती 26°C के साथ यूपी में सबसे गर्म रहा। मौसम विभाग ने आज और कल के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है। प्रदेश के कई जिलों में धूप भी निकली। बरेली और गोरखपुर में आज सुबह से कोहरा छाया है। गोरखपुर में सुबह साढ़े 10 बजे तक धूप नहीं निकली। लखनऊ की बात करें तो सुबह कहीं-कहीं कोहरा था। नौ बजे तक धूप निकल आई। उधर, उन्नाव के सोहरामऊ थाना क्षेत्र के लखनऊ-कानपुर हाईवे पर कोहरे के कारण पांच गाड़ियां आपस में टकरा गईं। हादसे के बाद लोगों में चीख-पुकार मच गई। 12 लोग घायल बताए जा रहे हैं।
शुक्रवार से पूरे यूपी में सर्द हवाएं चल रही हैं। इसकी वजह से यूपी में पारा 10°C से भी नीचे आ गया है। प्रदेश के 21 जिलों का न्यूनतम तापमान 10°C से भी नीचे बना हुआ है। जिसमें मुजफ्फरनगर, नजीबाबाद, मेरठ, मुरादाबाद, बरेली, अलीगढ़, शाहजहांपुर, आगरा, इटावा, हरदोई, लखनऊ, कानपुर, झांसी, उरई, हमीरपुर, फतेहपुर, फुर्सतगंज, सुल्तानपुर, बस्ती, वाराणसी और प्रयागराज शामिल हैं। कानपुर में CSA यूनिवर्सिटी के मौसम विज्ञानी डॉ. एसएन सुनील पांडेय के मुताबिक, आज और कल बारिश के पूरे आसार बने हैं। घने बादल छाए रहेंगे। प्रदेश में गरज-चमक के साथ हल्की बूंदा-बांदी हो सकती है। कुछ जगहों पर तेज बारिश भी हो सकती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के लखनऊ मौसम केंद्र के मुताबिक, आज और कल बारिश के आसार हैं। इसको लेकर विभाग ने चेतावनी भी जारी की है। वहीं, कानपुर में शनिवार रात से ही कोहरा छाया है। करीब 12 दिनों बाद कानपुर में रात से घना कोहरा छाया है। लखनऊ में भी रविवार सुबह कई इलाकों में कोहरा छाया रहा।झांसी में आज सुबह से तेज धूप खिली है। 11 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चल रही हवाओं के कारण ठंड का एहसास हो रहा है। शाम तक मौसम का मिजाज बदल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, आज हल्की बारिश हो सकती है। जबकि कल यानी सोमवार को झांसी में आंधी के साथ ओला गिरने के आसार हैं। अगर ऐसा हुआ तो पिछली बार की तरह इस बार भी फसलें खराब हो सकती हैं। इससे किसान परेशान हैं।
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Author: Vijay Singhal
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