हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में नवसंवत्सर 2083 के मौके पर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में बृहस्पतिवार सुबह पुरोहित ने आराध्य के समक्ष नए पंचांग का पूजन किया। आराध्य को पंचाग पढ़कर सुनाया गया। इस दौरान सेवाधिकारी ने ठाकुरजी को लाल रंग की पोशाक धारण कराई और माखन, मिश्री और नीम की कोपल का भोग लगाया। प्राचीन राधारमण मंदिर में भी पुरोहित ने आराध्य को पंचांग का श्रवण कराया। इस बार रौद्र नाम के संवत्सर का राजा बृहस्पति, मंत्री मंगल एवं कोतवाल चंद्रमा है।
सुबह श्रीबांकेबिहारी मंदिर में शृंगार आरती के बाद पुरोहित आचार्य छैल बिहारी मिश्र ने मंत्रोच्चार के बीच नए पंचांग का विधि-विधान से पूजन किया। इसके बाद आराध्य को पंचांग पढ़कर सुनाया। इस दौरान वर्ष भर होने वाले त्योहार, तिथि, पर्व का वाचन किया गया। सेवायत ब्रजेश गोस्वामी ने ठाकुरजी को गाजियाबाद से बनकर आई लाल रंग की जरी की पोशाक धारण कराने के साथ भव्य शृंगार किया। माखन मिश्री और नीम की कोंपल का प्रसाद गोस्वामियों और भक्तों में वितरित किया गया। पंडित छैलबिहारी मिश्र ने बताया कि पंचांग के अनुसार कृषि विभाग के शुक्र व खनिज विभाग के स्वामी शनि हैं। इस वर्ष अपराधी किस्म के व्यक्तियों में स्वयं सुधार आएगा अन्यथा प्रकृति द्वारा सुधार किया जाएगा। यह वर्ष सज्जन और न्यायकारी लोगों के लिए अनुकूल एवं अपराधियों के लिए दंडकारी रहेगा। कई देशों की सत्ता में बदलाव और गृह युद्ध के योग बन सकते हैं। सेना की दृष्टि से देश मजबूत और बाहरी रूप से सुरक्षित रहेगा। इस वर्ष सोने एवं पीतल की कीमतों में वृद्धि व भूगर्भ जल स्तर में कमी आएगी। आचार्य छैल बिहारी ने ठाकुर राधारमण मंदिर में भी आराध्य के समक्ष नया पंचांग पढ़कर सुनाया। मंदिर के सेवायत पद्मनाभ गोस्वामी ने बताया कि मंदिर में पर्व, त्योहार और उत्सव की तिथियां संवत पंरपरा में निहित हैं। भगवान को नव पंचांग सुनाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है।
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Author: Vijay Singhal
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