हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ़ विजय सिंघल
मथुरा। बरसाना में सोलह श्रृंगार कर, लंबा घूंघट ओढ़कर जब राधा की सखी को लाडली के महल से होली का निमंत्रण लेकर विदा किया जा रहा था तो वहीं ढोल की थाप पर श्रद्धालु झूम रहे थे। राधा की सखी हड़िया में गुलाल लेकर नंदभवन के लिए रवाना हुई। लठामार होली से पूर्व मंगलवार को बरसाना से कान्हा व उसने सखाओं को होली का निमंत्रण जाना था। जिसको लेकर राधारानी की सखी के रूप के राधा दासी सखी वर्षों से जा रही है। वृंदावन की रहने वाली राधा दासी सखी सुबह लाडलीजी मंदिर पहुंचीं है। जहां वो सोलह शृंगार करती हैं। इसके बाद राधारानी से अनुमति लेती है। इस दौरान मंदिर सेवायत द्वारा राधा दासी को हड़िया में गुलाल भरकर देते है। गुलाल के साथ इत्र, बीड़ा, फोआ व प्रसाद भी देते है। ढोल नगाड़ों के साथ राधा दासी लाडली जी मंदिर से नीचे उतर कर रंगीली गली पहुंची हैं। जहां स्थानीय लोग उसे बड़े भाव के साथ नंदभवन के लिए रवाना करते हैं। इस दौरान राधा दासी के साथ गोपाल सखी भी उनके साथ नंदगांव जाती है। राजस्थान के जयपुर में जन्मीं राधा दासी सखी बताती हैं कि 16 वर्ष कि उम्र में उसने अपना घर परिवार छोड़ दिया और वो वृंदावन आ गई। जहां उनका संर्पक श्यामा सखी से हुआ।बरसाना होली का निमंत्रण लेकर आज से 35 साल पहले श्यामा सखी नन्दभवन जाती थी, लेकिन उनके बाद अब मैं होली का निमंत्रण लेकर जा रही हूं। मैं सालभर से इस पल का इंतजार करती हूं कि कब राधारानी का प्रतिनिधित्व करने का सौभाग्य मिले कि कान्हा को होली सन्देश देने नन्दभवन जाए। लंबा घूंघट डालकर लहंगा चुनरी ओढ़कर तथा हड़िया में गुलाल व प्रसाद लेकर जब मैं नन्दभवन पहुंचती हूं तो नन्दगांव के लोग मेरा पूरा आदर−सत्कार करते है। इस सम्मान को पाकर में धन्य हो जाती हूं।
