नगरायुक्त जग प्रवेश ने बताया कि कार्यशाला में विभिन्न कंपनियों ने अपने प्रेजेंटेशन दिए। वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए शहर में डीजल-पेट्रोल के वाहनों के संचालन को हतोत्साहित करने और पर्यटकों के वाहनों को बाहरी पार्किंगों में खड़ा करवाने के बाद उन्हें मथुरा व वृंदावन में ई-वाहनों से ही भ्रमण की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास है।
धार्मिक बस सर्किट में चलेंगे ई-वाहन
नगरायुक्त ने बताया कि लोकल पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए पहले चरण में 20 ई-बसें रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड व अन्य स्थानों पर संचालित करने का विचार है। श्रद्धालुओं को होटल व धर्मशालाओं से मंदिरों तक लाने-ले जाने के लिए ई-बसों और ई-रिक्शा का संचालन किया जाएगा। इसके अलावा ई-रिक्शा व ई-आटो को भी इसके लिए नियमित और रूटवार तैयार किया गया है। 50 और ई-बसों की शासन से डिमांड
जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया कि वर्तमान में 50 ई-बसों का संचालन वृंदावन, बरसाना, गोवर्धन आदि में किया जा रहा है। शासन से 50 और ई-बसों की डिमांड की जाएगी, ताकि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके। कार्बन उत्सर्जन कम होगा और हरियालीदार रास्ते होंगे। धर्मनगरी में पूरी तरह ई-वाहनों के संचालन के लिए चार्जिंग स्टेशनों को बनाया जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि श्रद्धालु यहां सुकून और भक्ति की भावना लेकर आते हैं, लेकिन भीड़ और प्रदूषण उनके अनुभव को प्रभावित करता है। जीएमजेड से यह स्थिति बदलेगी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने कहा कि ट्रैफिक प्रबंधन और सख्त निगरानी से श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। कार्यशाला में जिला प्रशासन, नगर निगम, पुलिस विभाग और शहरी परिवहन विशेषज्ञों ने मथुरा–वृंदावन को स्वच्छ, सुविधाजनक और जाम-मुक्त बनाने की कार्ययोजना पर चर्चा की।
