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पहले गणेशरा, फिर संजय नगर के व्यावसायिक निर्माणों पर कार्रवाई की बना रहे रणनीति

ByVijay Singhal

Feb 7, 2026
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल

मथुरा एस्केप अपर खंड आगरा नहर को साढ़े तीन किलोमीटर में अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई 21 साल पुराने रिकॉर्ड और अदालती आदेशों की उलझन में फंस गई है। गुरुवार को भी प्रशासन और सिंचाई विभाग दिनभर दस्तावेजों की जांच में उलझे रहे, लेकिन ध्वस्तीकरण को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं हो सका। फिलहाल कार्रवाई रविवार तक के लिए टाल दी गई है। इसकी एक बड़ी वजह फोर्स न मिलना भी बताया जा रहा है। हाई कोर्ट ने वर्ष 2013 में मथुरा एस्केप को अतिक्रमण मुक्त कराने के आदेश दिए थे। जिसके बाद इस फैसले को पलटवाने के लिए मामला सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंचा। जहां से हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार को पुनर्वास करने का विकल्प दिया गया।बाद भी तमाम कानूनी प्रक्रियाओं के बीच वर्षों से चले आ रहे हाई कोर्ट के ऑर्डर का अनुपालन न होने के चलते जितेंद्र गौर ने 2025 में अवमानना याचिका दाखिल की, जिसमें सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को तलब किया गया और अगली तारीख तक हाई कोर्ट के आदेश पर अनुपालन सहित हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए। इस याचिका पर सिंचाई विभाग को 20 फरवरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट में ध्वस्तीकरण के अनुपालन से जुड़ा हलफनामा और वीडियोग्राफी के साथ आख्या दाखिल करनी है। हाई कोर्ट के अवमानना याचिका के ऑर्डर के क्रम में जब अतिक्रमण का चिह्नांकन किया तो गणेशरा व संजय नगर क्षेत्र में साढ़े तीन किलोमीटर में 800 दुकान, मकान व प्रतिष्ठान मिले। जिन पर अतिक्रमण के लिए नोटिस जारी करते हुए लाल क्रास का निशान लगाया जा चुका है। सिंचाई विभाग की प्रस्तावित योजना के अनुसार सबसे पहले गणेशरा क्षेत्र और उसके बाद संजय नगर के व्यावसायिक निर्माणों पर बुलडोजर चलाया जाना है। लेकिन प्रशासनिक अधिकारी सिंचाई विभाग से पूरे प्रकरण से जुड़े दस्तावेज मांग रहे हैं। इनमें यह देखा जा रहा है कि किन-किन वर्षों में मामला अदालतों में चला, कैनाल एक्ट के तहत मुकदमे कब दर्ज हुए, नोटिस कब जारी किए गए, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश क्या रहे और अवमानना याचिका में क्या निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन चाहता है कि ध्वस्तीकरण से पहले सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी हों, ताकि भविष्य में कोई कानूनी अड़चन न आए। दस्तावेजों की जांच में अभी एक-दो दिन और लग सकते हैं। इसी वजह से इस हफ्ते कार्रवाई रोक दी गई है। शुक्रवार को रिकॉर्ड जांच की कोई प्रक्रिया नहीं हुई, जबकि अगले हफ्ते सोमवार से दोबारा जांच और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि ध्वस्तीकरण कब और कैसे किया जाए, या यदि कार्रवाई नहीं होती तो 20 फरवरी को कोर्ट में क्या जवाब दिया जाएगा। वहीं संजय नगर में संभावित कार्रवाई की सूचना मिलते ही कई दुकानदारों ने अपनी दुकानें खाली कर दी हैं।

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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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